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लोकसभा और राज्यसभा में गुजराल को श्रद्धांजलि, कार्यवाही स्थगित
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:03-12-12 12:16 PM
Last Updated:03-12-12 01:09 PM
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पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल को श्रद्धांजलि देने के बाद लोकसभा की कार्यवाही आज दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
   
आज सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि मुझे यह बताते हुए काफी दुख हो रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल का निधन हो गया है। उन्होंने 9वीं एवं 10वीं लोकसभा में जालंधर सीट का प्रतिनिधित्व किया था। वे तीन बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे और कई संसदीय समितियों के सदस्य रहे।
   
भारतीय राजनीति में सरल स्वभाव और विनम्रता के लिए अलग पहचान बनाने वाले इंद्र कुमार गुजराल को देश दुनिया में गुजराल सिद्धांत के रूप में विदेश नीति को नया आयाम देने के लिए जाना जाता है और इसकी छाप प्रधानमंत्री के रूप में उनके छोटे कार्यकाल के दौरान भी मिली।
     
भारत के विदेश मंत्री के रूप में अपने दो कार्यकाल में गुजराल ने पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को व्यापक आधार प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जिसे भारत में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराहा गया। वे सात देशों में भारत के विशेष दूत भी बनाये गए।
     
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वे कई मंत्रालयों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे और दिवंगत इंदिरा गांधी ने उन्हें उस दौर की महाशक्ति रहे सोवियत संघ में भारत का राजदूत बनाया था। जब 1997 में जनता दल के नेतृत्व में छोटे छोटे क्षेत्रीय दलों के सहयोग से संयुक्त मोर्चे की सरकार बनी तो गुजराल का नाम आश्चर्यजनक रूप से प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आया और वे प्रधानमंत्री बने।
    
उनका निधन 30 नवंबर 2012 को गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में हो गया। अध्यक्ष ने भोपाल गैस त्रासदी की 28वीं बरसी का भी उल्लेख किया, जिसमें सैंकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। सदस्यों ने कुछ पल मौन रह कर गुजराल एवं गैस त्रासदी पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और उसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल को श्रद्धांजलि देने के बाद राज्यसभा की कार्यवाही आज दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति हामिद अंसारी ने गुजराल के निधन का जिक्र किया। गुजराल का 92 साल की उम्र में 30 नवंबर को निधन हो गया था। गुजराल तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे थे।
 
सभापति ने कहा कि गुजराल के निधन से एक वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी, एक महान राजनेता, एक कुशल प्रशासक और एक योग्य विद्वान को खो दिया। इसके बाद सदस्यों ने अपने स्थान पर खड़े होकर दिवंगत नेता के सम्मान में कुछ मिनट का मौन रखा।

 
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