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पूर्व थलसेना प्रमुख वीके सिंह करेंगे संसद का घेराव
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:03-12-12 03:09 PM
पूर्व थलसेना प्रमुख वीके सिंह मंगलवार को गन्ना किसानों के संसद का घेराव आंदोलन में शामिल होंगे। आयोजकों ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक कार्यकर्ता बने सिंह गन्ना किसानों के आंदोलन में शामिल होंगे।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन इस प्रदर्शन का आयोजन कर रहा है और इसमें किसान नेताओं और सिविल सोसाइटी सदस्यों के शामिल होने की संभावना है।
पूर्व थलसेना प्रमुख दो नवंबर को इस संगठन के संवाददाता सम्मेलन में शामिल हुए थे। संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की गयी थी कि अगर सरकार रंगराजन समिति की रिपोर्ट को खारिज नहीं करती है तो चार दिसंबर को संसद का घेराव किया जाएगा। रंगराजन समिति की यह रिपोर्ट चीनी क्षेत्र को मुक्त करने से संबंधित है।
संगठन के संयोजक वी एम सिंह ने कहा कि पूर्व थलसेना प्रमुख घेराव में शामिल होंगे। हमने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर 30 नवंबर तक का समय दिया था। हम अपनी घोषणा के अनुसार विरोध की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
रंगराजन समिति ने 80 हजार करोड़ रुपये के अति नियंत्रित चीनी उद्योग को चरणबद्ध तरीके से मुक्त करने की सिफारिश की है। आयोजकों का कहना है कि समिति की सिफारिशों से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश के किसान प्रभावित होंगे।
उन्होंने दावा किया कि आयोग ने सिर्फ चीनी मिलों की ओर से काम किया और किसानों के हितों की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि पहले से ही मुसीबतों का सामना कर रहे किसानों की दुश्वारियां और बढ़ जाएंगी।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन इस प्रदर्शन का आयोजन कर रहा है और इसमें किसान नेताओं और सिविल सोसाइटी सदस्यों के शामिल होने की संभावना है।
पूर्व थलसेना प्रमुख दो नवंबर को इस संगठन के संवाददाता सम्मेलन में शामिल हुए थे। संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की गयी थी कि अगर सरकार रंगराजन समिति की रिपोर्ट को खारिज नहीं करती है तो चार दिसंबर को संसद का घेराव किया जाएगा। रंगराजन समिति की यह रिपोर्ट चीनी क्षेत्र को मुक्त करने से संबंधित है।
संगठन के संयोजक वी एम सिंह ने कहा कि पूर्व थलसेना प्रमुख घेराव में शामिल होंगे। हमने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर 30 नवंबर तक का समय दिया था। हम अपनी घोषणा के अनुसार विरोध की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
रंगराजन समिति ने 80 हजार करोड़ रुपये के अति नियंत्रित चीनी उद्योग को चरणबद्ध तरीके से मुक्त करने की सिफारिश की है। आयोजकों का कहना है कि समिति की सिफारिशों से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश के किसान प्रभावित होंगे।
उन्होंने दावा किया कि आयोग ने सिर्फ चीनी मिलों की ओर से काम किया और किसानों के हितों की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि पहले से ही मुसीबतों का सामना कर रहे किसानों की दुश्वारियां और बढ़ जाएंगी।
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