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बापू को औपचारिक ढंग से नहीं मिली राष्ट्रपिता की उपाधि
गुडगांव, एजेंसी
First Published:11-07-12 08:08 PM
सरकार ने महात्मा गांधी को कभी औपचारिक रूप से राष्ट्रपिता की उपाधि प्रदान नहीं की है। यह खुलासा गृह मंत्रालय द्वारा सूचना का अधिकार कानून के तहत दी गई एक अर्जी के जवाब में हुआ है।
निदेशक एवं केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी ने इस साल 18 जून को दिए जवाब में कहा कि भले ही महात्मा गांधी को लोकप्रिय ढंग से राष्ट्रपिता कहा जाता है लेकिन सरकार ने कभी इस प्रकार की कोई उपाधि औपचारिक रूप से उन्हें प्रदान नहीं की। अभिषेक कादियान ने 21 मई, 2012 को गृह मंत्रालय में एक अर्जी देकर यह जानना चाहा था कि क्या महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता घोषित किया गया है। कादियान इटली स्थित पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ओआईपीए के सलाहकार हैं।
इससे पूर्व लखनऊ की छठी कक्षा की छात्र ऐश्वर्या पाराशर ने एक आरटीआई के तहत भेजी एक अर्जी में उस आदेश की फोटो प्रति मांगी थी जिसके तहत महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता घोषित किया गया था। उसे सूचित किया गया कि इस जानकारी के बारे में कोई विशिष्ट दस्तावेज नहीं है।
ऐश्वर्या ने इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री कार्यालय में केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी को आरटीआई अर्जी भेजी थी। पीएमओ से यह अर्जी गृह मंत्रालय के पास भेज दी गई थी। गृह मंत्रालय ने भी कहा था कि यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और उसे भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार में भेज दिया। राष्ट्रीय अभिलेखागार ने ऐश्वर्या को भेजे जवाब में कहा कि उसके पास उपलब्ध सार्वजनिक रिकार्ड की जांच के बाद पाया गया कि ऐसी कोई सूचना उनके पास नहीं है।
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टिप्पणियाँ
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महात्मा गॉंधी को यह उपाधि सरकार द्वारा नहीं दी गर्इ गर्इ बल्कि तत्कालीन गोंडल राज्य के एक सचिव द्वारा पहले अफ्रीका के पत्र में सम्बोधन और बाद में देश लौटने पर मानपत्र में लिखित रूप से दी गर्इ
By Dr. Yogendra Yadav (11th-July-2012 08:24:PM)
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