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डीएम अपहरण मामले में मोहलत समाप्त, तनाव बढ़ा
रायपुर, एजेंसी
First Published:25-04-12 08:24 PM
छत्तीसगढ़ में जिलाधिकारी एलेक्स पॉल मेनन को अगवा करने वाले नक्सलियों की ओर से दी गई मोहलत बुधवार शाम पांच बजे समाप्त होने के बाद तनाव बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि जिलाधिकारी को लेकर नक्सलियों ने क्या फैसला किया है, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने कहा, ‘मोहलत शाम पांच बजे समाप्त हो जाने के बाद मेनन के बारे में हमारी नक्सलियों के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।’ अधिकारियों ने बताया, ‘हमने सुना है कि जिलाधिकारी की किस्मत पर फैसला करने के लिए नक्सलियों ने बस्तर इलाके के नगाराम इलाके में एक जन अदालत का आयोजन किया है।’
छत्तीसगढ़ में सुकमा जिले के जिलाधिकारी एलेक्स पॉल मेनन (32) भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2006 बैच के अधिकारी हैं। उनका यहां से करीब 500 किलोमीटर की दूरी पर एक जंगली इलाके में शनिवार को बंदूक के बल पर अपहरण कर लिया गया था।
अपहरण के समय वह जनजातीय लोगों से बातचीत कर रहे थे। नक्सलियों ने मेनन के अपहरण का विरोध वाले उनके दो सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी थी। रिपोर्टों में कहा गया है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यालय के अधिकारी नक्सलियों की ओर से सम्भावित मोहलत बढ़ाए जाने के बारे में जानकारी पाने के लिए जिले में अधिकारियों से लगातार सम्पर्क कर रहे हैं।
नक्सलियों की मांग है कि छत्तीसगढ़ की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार जेल में बंद उनके आठ महत्वपूर्ण साथियों मराकाम गोपानाम, निर्मल अक्का, देवपाल चंद्र शेखर रेड्डी, शांति प्रिया रेड्डी, मीना चौधरी, कोरासा सनी, मरकाम सनी और असित कुमार सेन को रिहा कर दे। इसके लिए उन्होंने 25 अप्रैल की शाम पांच बजे तक की मोहलत दी थी।
गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘यहां पुलिस मुख्यालय व आईएएस समुदाय में बहुत ज्यादा तनाव है। लेकिन मेनन के परिवार और खासतौर पर मानसिक तनाव से गुजर रहीं उनकी पत्नी आशा के लिए यह बहुत खराब समय है।’
उन्होंने कहा कि राहत की बात केवल यही है कि नक्सलियों ने तीन प्रस्तावित मध्यस्थों में से एक मनीष कुंजाम को मंगलवार को मेनन के लिए दवाएं लेकर सुकमा में अपने ठिकाने पर पहुंचने की इजाजत दे दी। मेनन दमे के मरीज हैं।
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के पूर्व विधायक व भारतीय कम्युस्टि पार्टी (भाकपा) के नेता कुंजाम ने मेनन के सुकमा स्थित आधिकारिक आवास से उनकी पत्नी आशा मेनन से दवाएं लीं और मंगलवार शाम चिंतागुफा इलाके में पहुंचे। इसके बाद वह जंगल में गए और मेनन को दवाएं सौंपी।
मीडिया को भेजे संदेश में नक्सलियों ने हैदराबाद के प्रोफेसर हरगोपाल को मध्यस्थ बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के वकील प्रशांत भूषण व कुंजाम ने मध्यस्थ बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
हरगोपाल फरवरी 2011 में मल्कानगिरी के जिलाधिकारी आर विनील कृष्णा की रिहाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। कृष्णा को नक्सलियों ने ओडिशा में बंधक बना लिया था।
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