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हमने मिनटों में पहुंचकर की पीड़िता की मदद: पुलिस
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:05-01-13 06:52 PMLast Updated:06-01-13 10:34 AM
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दिल्ली पुलिस ने 16 दिसम्बर को सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई युवती के दोस्त द्वारा लगाए गए इस आरोप का शनिवार का खंडन किया कि पुलिसकर्मियों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर बहस होती रही, जिसमें बहुत मूल्यवान समय गंवा दिया गया। वह समय पीड़िता की जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता था।

दिल्ली पुलिस ने एक संक्षिप्त स्पष्टीकरण में कहा कि पुलिस नियंत्रण कक्ष की वैन को फोन पर पहली सूचना उस रात 10.22 बजे मिली थी कि एक युवती सहित खून से लथपथ दो लोग सड़क पर पड़े हुए हैं।

पुलिस ने दावा किया कि बचाव के लिए दो वैन घटनास्थल पर चंद मिनट में ही पहुंच गई थीं और पहली सूचना मिलने के 33 मिनट के भीतर पीड़िता को अस्पताल ले जाया गया था।

दिल्ली पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ''पीसीआर वैन को फोन पर सूचना 10:21:35 पर मिली थी। सभी पीसीआर वैनों के लिए सूचना प्रसारित कर दी गई थी और वैन जेड-54 को घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया गया था।''

बयान में कहा गया है कि पीसीआर वैन ई-42  घटनास्थल पर 10:27:43 पर पहुंची थी।

बयान में कहा गया है, ''पीसीआर वैन जेड-54 सूचना मिलने के 7.9 मिनट बाद 10:29:29 पर घटनास्थल पर पहुंची और वह 10:29:30 पर पीडिम्ता को लेकर रवाना हुई थी। वह 16.20 मिनट में यानी 10.55 पर सफदरजंग अस्पताल पहुंची थी।

दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त (दक्षिण-पश्चिम) विवेक गोगिया ने कहा कि दोनों पीड़िता को पीसीआर वैन जेड-54 में 16 मिनट में अस्पताल ले जाया गया था।

उन्होंने कहा कि पीसीआर वैन घटनास्थल पर पहुंची और पुलिसकर्मियों ने नजदीक के एक होटल से एक बेडशीट का इंतजाम किया था।

समाचार चैनल 'जी न्यूज' पर पीड़िता के दोस्त द्वारा लागाए गए आरोपों का बिंदुवार जवाब देते हुए गोगिया ने कहा कि अधिकार क्षेत्र को लेकर पीसीआर वैनों में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच कोई झगड़ा नहीं हुआ था।

उन्होंने कहा कि पीसीआर वैन सीधे तौर पर नियंत्रण कक्ष से संचालित होती हैं, किसी पुलिस थाने से नहीं।

गोगिया ने कहा, ''पीसीआर सिस्टम सीधे तौर पर जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) से जुड़े एक केंद्रीकृत सिस्टम से जुड़ा होता है।''

पीड़िता के दोस्त के यह कहने पर कि उन्हें नजदीक के किसी अस्पताल में भी ले जाया जा सकता था, गोगिया ने कहा कि ऐसे मामलों में घायलों को किसी अधिसूचित सरकारी अस्पताल में ले जाया जाता है ताकि वहां वैधानिक रूप से चिकित्सीय जांच हो सके।

उन्होंने कहा कि पीड़िता के दोस्त को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसके रहने की समुचित व्यवस्था की गई और उस पर आया खर्च पुलिस ने वहन किया।

पीड़िता के दोस्त की इस टिप्पणी पर कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की प्रशंसा नहीं की जानी चाहिए, गोगिया ने कहा कि वे सराहना या प्रशंसा की अपेक्षा नहीं रखते।

गोगिया ने कहा, ''हमने अपना दायित्व निभाया और आला अधिकारियों को जानकारी दी।''     

उल्लेखनीय है कि 16 दिसम्बर को हुए भयानक हादसे के बाद पीड़िता के दोस्त ने शुक्रवार को पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि उसे लगता है कि 23 वर्षीया पीड़िता को बचाया जा सकता था।

उसने पीड़िता को अस्पताल पहुंचाने में हुई दो घंटे से अधिक की देरी के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि क्षेत्राधिकार को लेकर तीनों पीसीआर वैनों में मौजूद पुलिसकर्मी आपस में झगड़ने लगे थे।

 
 
 
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