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योगेंद्र और उनकी दोस्त पाओलिन ने पुलिस के दावों पर सवाल उठाये थे, जिसमें कहा गया था कि कांस्टेबल की पिटाई की गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई।
सुभाष तोमर की मौत के सिलसिले में चश्मदीदों को नोटिस
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:27-12-12 11:49 AM
Last Updated:27-12-12 03:29 PM
दिल्ली पुलिस ने कांस्टेबल सुभाष चंद तोमर की मौत के मामले में पुलिस के दावे पर सवाल उठाने वाले एक युवक और उसकी दोस्त को जांच में शामिल होने के लिये कहा है। पुलिस ने इस संबंध में योगेंद्र और उसकी दोस्त पाओलिन को नोटिस भेजा है।
राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर टी एस सिद्धू को भी इस जांच का हिस्सा बनने के लिये कहा गया है। उन्होंने ही कहा था कि तोमर को बाहरी या अंदरूनी चोटें नहीं आई थीं।
रविवार को हुए हिंसक प्रदर्शन में घायल कांस्टेबल तोमर की मौत के कारण को लेकर तब विवाद हो गया था, जब सरकारी अस्पताल द्वारा कहा गया था कि तोमर के शरीर पर कोई बाहरी या अंदरूनी चोट के निशान नहीं थे। जबकि बाद में आई पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में इसके विपरीत तथ्य सामने आये।
अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा किये गये पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट के एक हिस्से को कल दिल्ली पुलिस ने जारी किया था। रिपोर्ट पढ़ते हुये अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के सी द्विवेदी ने बताया कि किसी बाहरी प्रहार के कारण गर्दन और सीने पर आई अनेक चोटों के चलते दिल का दौरा पड़ा और इससे जुड़ी अन्य जटिलताएं पैदा हुईं।
वहीं दोनों चश्मदीदों का दावा है कि जब इंडिया गेट के पास कांस्टेबल तोमर जमीन पर गिरे और उन दोनों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, तो उन्हें उनके शरीर पर कोई चोट नहीं दिखी।
राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर टी एस सिद्धू ने कहा था कि कटने के कुछ निशान और छिले होने के निशानों के अलावा उनके शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं थ़े, हमारे रिकॉर्ड के अनुसार कोई गंभीर अंदरूनी चोट नहीं है, लेकिन असल बात पोस्ट मार्टम के बाद ही सामने आयेगी।
योगेंद्र और उनकी दोस्त पाओलिन ने पुलिस के उस दावे पर सवाल उठाये थे जिसमें कहा गया था कि कांस्टेबल की पिटाई की गयी थी, जिससे उनकी मौत हो गयी। दोनों का कहना था कि तोमर स्वयं ही गिर गये थे।
राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर टी एस सिद्धू को भी इस जांच का हिस्सा बनने के लिये कहा गया है। उन्होंने ही कहा था कि तोमर को बाहरी या अंदरूनी चोटें नहीं आई थीं।
रविवार को हुए हिंसक प्रदर्शन में घायल कांस्टेबल तोमर की मौत के कारण को लेकर तब विवाद हो गया था, जब सरकारी अस्पताल द्वारा कहा गया था कि तोमर के शरीर पर कोई बाहरी या अंदरूनी चोट के निशान नहीं थे। जबकि बाद में आई पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में इसके विपरीत तथ्य सामने आये।
अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा किये गये पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट के एक हिस्से को कल दिल्ली पुलिस ने जारी किया था। रिपोर्ट पढ़ते हुये अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के सी द्विवेदी ने बताया कि किसी बाहरी प्रहार के कारण गर्दन और सीने पर आई अनेक चोटों के चलते दिल का दौरा पड़ा और इससे जुड़ी अन्य जटिलताएं पैदा हुईं।
वहीं दोनों चश्मदीदों का दावा है कि जब इंडिया गेट के पास कांस्टेबल तोमर जमीन पर गिरे और उन दोनों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, तो उन्हें उनके शरीर पर कोई चोट नहीं दिखी।
राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर टी एस सिद्धू ने कहा था कि कटने के कुछ निशान और छिले होने के निशानों के अलावा उनके शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं थ़े, हमारे रिकॉर्ड के अनुसार कोई गंभीर अंदरूनी चोट नहीं है, लेकिन असल बात पोस्ट मार्टम के बाद ही सामने आयेगी।
योगेंद्र और उनकी दोस्त पाओलिन ने पुलिस के उस दावे पर सवाल उठाये थे जिसमें कहा गया था कि कांस्टेबल की पिटाई की गयी थी, जिससे उनकी मौत हो गयी। दोनों का कहना था कि तोमर स्वयं ही गिर गये थे।
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