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सबसे बड़ा सवाल, आखिर कैसे हुई हवलदार तोमर की मौत
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान First Published:26-12-12 10:07 AMLast Updated:26-12-12 01:38 PM

जनता की पिटाई या आंसू गैस के धुंए व लाठीचार्ज से मची भगदड़ से लगा सदमा! दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल सुभाष चंद तोमर की मौत की असल वजह इनमें से क्या हो सकती है?

दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार कहते हैं पेट, छाती और गर्दन में चोट के निशान पाए गए हैं। सिपाही रविवार को इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारियों के उपद्रव का शिकार हुआ है। वहीं राम मनोहर लोहिया अस्पताल, जहां सिपाही की मौत हुई, वहां के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टीएस सिद्धू कहते हैं, सदमे के चलते सिपाही को हार्ट अटैक आया था। उसके शरीर पर कहीं भी गंभीर चोट के निशान नहीं थे।

अस्पताल के सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि सिपाही को हृदय संबधी बीमारी पहले से थी। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब इंडिया गेट पर इतना बड़ा प्रदर्शन चल रहा था, तो हृदय रोगी सिपाही की वहां ड्यूटी क्यों लगाई गई? हालांकि इस बारे में दिल्ली पुलिस का कोई अधिकारी कुछ नहीं बोल नहीं चाह रहा है।

दिल्ली पुलिस के जिन 35 पुलिसकर्मियों की रविवार को हुई घटना में अस्पताल में एमएलसी हुई उसमें सुभाष चंद भी एक था। सोशल नेटवर्किंग साइट पर इस मामले में कई फोटो भी प्रकाशित हो रहे हैं। जिनमें सुभाष चंद जमीन पर लेटे दिख रहे हैं। पुलिसकर्मियों के साथ कुछ प्रदर्शनकारी जिनमें युवती भी शामिल है, उनके हाथों की मालिश करते नजर आ रहे हैं।

सोशल साइट पर ही सवाल उठाया गया है कि जब कोई व्यक्ति चक्कर खाकर या कोई दौरा आदि आने से गिरता है तभी उसके हाथ पैर की मालिश होती है, प्रदर्शनकारियों की पिटाई से घायल को तो तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाता है।

इस बाबत दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त ताज हसन, जो स्वयं रविवार को इंडिया गेट पर मौजूद थे तथा पुलिस बल का नेतृत्व कर रहे थे, का मीडिया को दिया बयान भी अहम है। ताज हसन ने कहा है कि कांस्टेबल सुभाष इंडिया गेट पर कानून व्यवस्था संभालने की ड्यूटी पर था। उसे बेहोशी हालत में उठाया गया था। हमने एक बहादुर सिपाही को खो दिया है। इसका दुख है।

जबकि सोमवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दावा किया था कि सुभाष को मारा-पीटा गया। वह नीचे गिर गया तो लोग उसके ऊपर से गुजरते चले गए।

आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक सिद्धु कहते हैं दिल्ली पुलिस के सिपाही सुभाष तोमर को जब अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था, उसे गहरा शॉक (सदमा) लगा था। जिसकी वजह से उसे हृदयाघात हुआ। इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने के बाद उसे आइसीयू में वेंटिलेटर (जीवन रक्षक उपकरण) पर रखा गया था। उसके शरीर में कहीं भी गंभीर चोट के निशान नहीं थे। सिर्फ हाथ व सीने पर मामूली चोट थी।

उन्होंने कहा कि सुभाष की कोई सर्जरी करने का मौका नहीं मिल पाया। अस्पताल सूत्रों की मानें तो सिपाही को सुबह 6:22 पर एक और हार्ट अटैक आया था, जो उसकी मौत का कारण बना। चिकित्सा अधीक्षक से जब पूछा गया कि पुलिस सिपाही की मौत का कारण पिटाई से लगी चोट बता रही है, तो उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चल जाएगा कि सच्चाई क्या है।

कुछ यही जवाब पुलिस आयुक्त नीरज कुमार का था। उनसे सवाल किया गया तो जवाब था मैं डॉक्टर नहीं हूं। हार्ट अटैक चोट की वजह से हुआ या बिना चोट के, यह मैं नहीं बता सकता। लेकिन उसके शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। मौत की असली वजह दो दिन में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आ जाएगी।

खास बात यह है कि दिल्ली पुलिस के जवानों में हृदयरोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव तथा मोटापे संबंधी बीमीरियां आम बात है। लंबी ड्यूटी व अत्यधिक तनाव में काम करने का असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है इसका खुलासा हाल ही में एक निजी अस्पताल द्वारा पुलिसकर्मियों की हेल्थ जांच में हुआ था।

सवाल यह भी है कि देश की राजधानी में सख्त ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य की चिंता करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्यों नहीं पुलिसकर्मियों के लिए ऐसा माहौल बनाया जाता जिसमें वह तनाव मुक्त होकर अपने फर्ज को अंजाम दे सकें।

दिल्ली पुलिस के सिपाही सुभाष चंद तोमर का पुलिस सम्मान के साथ निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर केंद्रीय उड्डयन मंत्री अजीत सिंह, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह, गृह सचिव आरके सिंह, पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने पुष्प चक्त्र से सुभाष चंद श्रद्धांजलि दी। सिपाही के शव को मंगलवार ढाई बजे निगम बोध घाट पर लाया गया। परिजनों ने यहीं पर उनका अंतिम दर्शन किया।
 
 
 
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