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गैंगरेप मामले में उच्च न्यायालय ने लगाई पुलिस को फटकार
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:19-12-12 03:34 PM
Last Updated:19-12-12 04:33 PM
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एक चलती बस में 23 साल की लड़की से सामूहिक बलात्कार के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज शहर पुलिस की खिंचाई करते हुए पूछा कि अपराध का पता कैसे नहीं चला।
    
मुख्य न्यायाधीश डी मुरुगेसन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राजधानी के सभी नागरिकों के लिए यह घटना गहरी चिंता की बात है क्योंकि यह दिल्ली में विशेषकर महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा से संबंधित है। पीठ ने शहर के पुलिस आयुक्त से दो दिन के भीतर विस्तत स्थिति रिपोर्ट पेश करने को भी कहा।
    
अदालत ने रंगीन शीशे वाले वाहनों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश लागू नहीं होने पर भी नाराजगी जताई और दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता से यह पूछा कि यह आदेश अब तक लागू क्यों नहीं हुआ।
    
पीठ ने कहा कि दो महत्वपूर्ण सवाल हैं। पहला मामले की जांच से जुड़ा है और दूसरा रोकथाम के उपायों से। हम जानना चाहते हैं कि पुलिस ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कौन से ऐहतियाती कदम उठाए हैं।
     
पीठ ने कहा कि अदालत ने अपने ही प्रस्ताव के आधार पर इस मामले को सूचीबद्ध किया है। पुलिस को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश देते हुए अदालत ने कहा कि जांच उच्च स्तर की होनी चाहिए और इस अदालत द्वारा अंतिम आरोप पत्र के अवलोकन के बाद ही इसे दायर किया जाए।
    
उन्होंने कहा कि हम इस अदालत में समय समय पर जरूरी निर्देश देंगे। यह अदालत सभी संबंधित पक्षों के दावों के आधार पर दिशानिर्देश भी जारी करेगी। अदालत ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि किस तरह रंगीन शीशे वाली एक बस 40 मिनट तक दिल्ली की सड़कों पर घूमती रही और इस दौरान लड़की के साथ हुए यौन शोषण का पता नहीं चला।
     
अदालत ने कहा कि हमें यह समझ नहीं आ रहा कि एक बस 40 मिनट के लिए कैसे निगरानी से दूर रही, पुलिस आयुक्त को एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया जाता है जिसमें क्षेत्र में गश्त ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों का ब्योरा भी शामिल हो।
     
अदालत ने कहा कि पुलिस आयुक्त यह भी बताएंगे कि सार्वजनिक परिवहन सहित सभी वाहनों से रंगीन शीशे हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए। पीठ ने पुलिस से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में सभी प्रवेश बिन्दुओं पर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाए ताकि रंगीन शीशे वाले वाहन यहां नहीं घुस पाएं।
     
अदालत ने सीएफएसएल के निदेशक को इस मामले की जांच को प्रमुखता देने का आदेश दिया है। उन्होंने सरकारी अस्पताल में मौजूद पीड़ित लड़की की वर्तमान स्थिति भी पूछी और दिल्ली सरकार से उसे सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में स्थानान्तरित करने पर विचार करने के लिए कहा।
     
न्यायमूर्ति मुरुगेसन ने इस मामले की सुनवाई शुक्रवार के लिए स्थगित करते हुए कहा, हम दिल्ली सरकार को निर्देश देते हैं कि अगर संभव हो तो पीड़ित को सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में स्थानान्तरित किया जाए। अगर ऐसा करना संभव नहीं हो तो उसके लिए विशेषज्ञों को वहीं बुलाया जाए।
     
इससे पहले सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उसने बलात्कार के मामलों की जल्दी सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का मुख्यमंत्री का आग्रह स्वीकार कर लिया है। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता नाजमी वाजिरी ने कहा कि अदालत सामूहिक बलात्कार के मामलों में भी फास्ट ट्रैक अदालत गठित करने पर विचार कर सकती है।
     
न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडला ने कहा कि अगर किसी मामले में जांच गलत तरीके से होती है तो फास्ट ट्रैक अदालतें काम नहीं कर पाएंगी। बल्कि इससे (आरोपी) तीन महीने में बरी हो जाएंगे।
     
एंडला ने कहा कि जांच उच्च स्तर की होनी चाहिए। अदालत ने साथ ही पूछा कि क्या आपने बस की फारेंसिक तरीके से जांच की है। वजीरी ने अदालत को सूचित किया कि पुलिस उपायुक्त छाया शर्मा के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित किया गया है और व्यवस्थित एवं तेज गति से जांच जारी है।
     
पच्चीस महिला वकीलों के एक समूह ने कल एक अन्य पीठ के समकक्ष मामला रखा था जिसके बाद पीठ ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह इस निर्लज्ज मामले में गौर करेगी। अदालत ने कहा था कि यह कुछ लोगों द्वारा निर्लज्ज प्रयास है जो सोचते हैं कि वे कानून व्यवस्था के साथ खेल सकते हैं। हम बहुत परेशान हैं। इस दुर्भाग्यपूर्ण मामले के अपराधियों को कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए।
     
पूर्व डूसू अध्यक्ष मोनिका अरोड़ा सहित इन वकीलों ने पीठ के समक्ष यह मामला रखकर स्वत: संज्ञान लेने और मामले की जांच की निगरानी करने का अनुरोध किया था।

 
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