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आरोपियों के वकील का विरोध, बंद कमरे में होगी सुनवाई
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:07-01-13 03:32 PMLast Updated:07-01-13 05:21 PM
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राजधानी में 16 दिसंबर की रात चलती बस में सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में आज आरोपियों की पैरवी के लिए आए वकील और अन्य वकीलों के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। उधर, खचाखच भरे अदालत कक्ष में आरोपियों को पेश नहीं किया जा सका। 

दिल्ली गैंगरेप की सुनवाई बंद कमरे में होगी। कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की अर्जी को मंजूर कर लिया है। सुनवाई के दौरान आरोपी और वकील ही कोर्ट में मौजूद रहेंगे। सोमवार को कोर्ट में भारी भीड़ और हंगामे के कारण पांचों आरोपियों की पेशी कोर्ट में नहीं हो सकी।
    
आरोपियों का बचाव नहीं करने के वकीलों के विभिन्न संगठनों के संकल्प के बीच यह पहली बार है जब कोई वकील पांच आरोपियों की पैरवी के लिए आया। अधिवक्ता मोहन लाल शर्मा ने अदालत में पेश होकर मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल से कहा कि उन्हें कुछ आरोपियों के रिश्तेदारों की ओर से उनकी पैरवी के लिए फोन आया था।
   
उन्होंने कहा कि वह तिहाड़ जेल नहीं जा पाने के कारण वकालतनामे पर आरोपियों के हस्ताक्षर नहीं ले पाए। शर्मा ने मजिस्ट्रेट से अदालत में आरोपियों के हस्ताक्षर लेने की अनुमति देने का आग्रह किया।
   
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने हालांकि, उन्हें इस बात की अनुमति नहीं दी और कहा कि वह इस काम के लिए तिहाड़ जेल जाएं। अदालत द्वारा शर्मा का आग्रह खारिज किए जाने के साथ ही दो अन्य वकीलों ने मुकदमे में मदद के लिए अदालत मित्र के रूप में अपनी सेवाएं देने का आग्रह किया।
   
इस दौरान मीडिया कर्मियों, वकीलों और पुलिसकर्मियों से खचाखच भरे अदालत कक्ष में जगह की कमी की वजह से पांच आरोपियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को पेश नहीं किया जा सका।
   
मजिस्ट्रेट ने इसके बाद अदालत में मौजूद लोगों से आरोपियों को अंदर लाने देने के लिए कुछ जगह करने को कहा, लेकिन कुछ जगह बनाए जाने के बावजूद पुलिस ने पांचों आरोपियों को यह कहकर पेश करने से इनकार कर दिया कि वह उन्हें तभी लेकर आएगी जब अदालत कक्ष पूरी तरह खाली होगा। आरोपियों को अब चेम्बर में पेश किए जाने की संभावना है।
  
पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के बाद अदालत ने उन्हें पेशी वारंट जारी किया था। इस बीच, मीडिया का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस ने मीडिया को परामर्श जारी कर कार्यवाही की रिपोर्टिंग नहीं करने को कहा है।
  
अदालत ने हालांकि, कहा कि उसे इस संबंध में पुलिस का कोई आवेदन नहीं मिला है। आरोपी विनय और पवन ने कल अदालत से कहा था कि वे मामले में सरकारी गवाह बनना चाहते हैं, जबकि राम सिंह और मुकेश ने अपने बचाव के लिए कानूनी मदद मांगी थी।
  
अदालत ने पांच जनवरी को पांचों वयस्क आरोपियों के खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लिया था।
  
इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302 (हत्या), 307 (हत्या के प्रयास), 376 (2) (जी) (सामूहिक बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 395 (डकैती में हत्या), 394 (डकैती में नुकसान पहुंचाने), 201 (साक्ष्य मिटाने), 120 बी (साजिश), 34 (समान इरादा) और 412 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) के तहत आरोपपत्र दायर किया गया था।
  
छठे आरोपी (जो नाबलिग है) के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई होनी है।

गत 16 दिसंबर की रात चलती बस में पैरामेडिकल छात्रा के साथ बर्बर सामूहिक बलात्कार किया गया था। 29 दिसंबर को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।

 
 
 
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