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आने-जाने वालों ने भी नहीं की पीड़िता की मदद...
बलिया, एजेंसी First Published:05-01-13 01:47 PM
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दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड का शिकार हुई 23 वर्षीय लड़की के भाई ने कहा है कि यदि उसकी बहन को अस्पताल पहुंचाये जाने में विलंब न होता, तो उसकी जान बच सकती थी, मगर आते जाते लोगो ने कोई सहायता नहीं की।
     
मेडवार कला गांव में लड़की के भाई ने कहा कि मेरी बहन ने मुझे बताया था कि बस से सड़क पर फेंके के बाद उसने उधर से गुजरने वाले लोगो से मदद मांगी थी, मगर किसी ने उनकी सहायता नहीं की।
     
उन्होंने कहा कि उसे सहायता तब मिली जब हाईवे गश्ती पुलिस वाहन ने इस बारे में पुलिस को सूचित किया और उसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। इस बीच दो घंटे गुजर गये और उसके शरीर से काफी रक्त बह गया, जिससे उसकी स्थिति बिगड़ती चली गयी।
     
लड़की के भाई ने उसके साथ हुई वारदात के बाद चले जनआंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि अब जिस तरह की संवेदना दिखाई पड़ रही है, लोगो को उसी तरह अपने व्यवहार और सोच में भी बदलाव लाना होगा, ताकि कोई आदमी समय से सहायता के अभाव में न मर जाये।
     
उन्होंने नई दिल्ली में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के प्रतिनिधियो के बीच हुई बातचीत में बलात्कार के मामले में मृत्यु दंड की सजा दिये जाने पर आम सहमति नहीं बन पाने पर अफसोस व्यक्त किया, मगर साथ ही यह भरोसा भी जताया कि दिल्ली पुलिस ने उसकी बहन के साथ कांड करने वाले दरिंदो के विएद्ध जैसा आरोप पत्र दाखिल किया है, उससे उन्हें फांसी की सजा निश्चित है।
     
उन्होंने बताया कि उनकी बहन को फिल्में देखने का शौक था और वह आमिर खान की फैन थी तथा परिवार के लोगों के साथ उसने जो अंतिम फिल्म देखी थी वह तलाश थी।

 
 
 
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