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विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से संसद का विशेष सत्र बुलाने और गृह मंत्री से सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था।
राष्ट्रपति से मिलेगा भाजपा का प्रतिनिधिमंडल, संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:24-12-12 04:17 PM
Last Updated:24-12-12 06:52 PM
महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के खिलाफ कड़े कानून बनाने के लिए संसद का विशेष सत्र और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मुख्य विपक्षी दल की मांग सरकार द्वारा नहीं मानी जाने पर भाजपा ने इस संबंध में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने का फैसला किया है।
इस मुद्दे पर भाजपा कोर ग्रुप की यहां हुई बैठक के बाद विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने संवाददाताओं को यह जानकारी दी। बैठक के बाद सुषमा ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री से संसद का विशेष सत्र बुलाने और गृह मंत्री से सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। लेकिन दोनों ही मामलों में सरकार की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि चूंकि प्रधानमंत्री ने विशेष सत्र बुलाने की हमारी मांग को अस्वीकार कर दिया है, इसलिए अब हम राष्ट्रपति से गुहार लगाएंगे कि वह सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाने को कहें। हमने राष्ट्रपति के समक्ष अपनी बात रखने के लिए उनसे कल मिलने का समय मांगा है।
पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के निवास पर हुई बैठक के बाद विपक्ष की नेता ने कहा कि महिलाओं के विरूद्ध जघन्य अपराधों को लेकर लोग आक्रोशित हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन पर जोर देते हुए उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।
बलात्कार के अपराधियों को मृत्यु दंड देने का प्रावधान करने सहित भाजपा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों से निपटने के लिए कड़े कानून बनाने की मांग कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बलात्कार के खिलाफ रोष प्रकट करने वाले छात्रों के साथ इंडिया गेट और विजय चौक पर पुलिस ने जो बर्बरता दिखाई है उसने आपातकाल की याद दिला दी है। उन्होंने कहा कि लड़कियों तक पर लाठियां भांजी गई।
सुषमा ने कहा कि पुलिस ने कितने बड़े पैमाने पर लाठी चार्ज किया उसका अंदाजा इसी से हो जाता है कि कल की पुलिस कार्रवाई में 80 छात्र छात्राएं घायल हुए हैं।
सरकार को उन्होंने आगाह किया कि वीभत्स बलात्कार की घटना के खिलाफ उभरे जन आक्रोश को अगर डंडो के दम पर दबाने का प्रयास होगा, तो इसमें उसे सफलता नहीं मिलेगी।
उन्होंने कहा कि देश में हर 20 मिनट पर बलात्कार की घटनाएं होती हैं। हर रोज के अखबार ऐसी घटनाओं की खबरों से भरे होते हैं। इन्हीं के खिलाफ जनता का दबा हुआ गुस्सा सड़कों पर फूटा है। सरकार को उसे बल के द्वारा दबाने की बजाय समस्या का हल खोजने के गंभीर प्रयास करने चाहिए।
इससे पहले भाजपा ने महिलाओं के विरुद्ध जघन्य अपराधों को रोकने संबंधी प्रधानमंत्री के देश के नाम संदेश पर कहा कि वह जनता में विश्वास उत्पन्न नहीं कर पाया है।
पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री जनता के मन का वेग समझने में असफल रहे हैं। जनता कड़े कानून और समयबद्ध कार्रवाई चाहती है। प्रधानमंत्री का बयान यह बहुत देर से आया, बहुत कम भरोसा दिलाने वाला है।
इस मुद्दे पर भाजपा कोर ग्रुप की यहां हुई बैठक के बाद विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने संवाददाताओं को यह जानकारी दी। बैठक के बाद सुषमा ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री से संसद का विशेष सत्र बुलाने और गृह मंत्री से सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। लेकिन दोनों ही मामलों में सरकार की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि चूंकि प्रधानमंत्री ने विशेष सत्र बुलाने की हमारी मांग को अस्वीकार कर दिया है, इसलिए अब हम राष्ट्रपति से गुहार लगाएंगे कि वह सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाने को कहें। हमने राष्ट्रपति के समक्ष अपनी बात रखने के लिए उनसे कल मिलने का समय मांगा है।
पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के निवास पर हुई बैठक के बाद विपक्ष की नेता ने कहा कि महिलाओं के विरूद्ध जघन्य अपराधों को लेकर लोग आक्रोशित हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन पर जोर देते हुए उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।
बलात्कार के अपराधियों को मृत्यु दंड देने का प्रावधान करने सहित भाजपा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों से निपटने के लिए कड़े कानून बनाने की मांग कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बलात्कार के खिलाफ रोष प्रकट करने वाले छात्रों के साथ इंडिया गेट और विजय चौक पर पुलिस ने जो बर्बरता दिखाई है उसने आपातकाल की याद दिला दी है। उन्होंने कहा कि लड़कियों तक पर लाठियां भांजी गई।
सुषमा ने कहा कि पुलिस ने कितने बड़े पैमाने पर लाठी चार्ज किया उसका अंदाजा इसी से हो जाता है कि कल की पुलिस कार्रवाई में 80 छात्र छात्राएं घायल हुए हैं।
सरकार को उन्होंने आगाह किया कि वीभत्स बलात्कार की घटना के खिलाफ उभरे जन आक्रोश को अगर डंडो के दम पर दबाने का प्रयास होगा, तो इसमें उसे सफलता नहीं मिलेगी।
उन्होंने कहा कि देश में हर 20 मिनट पर बलात्कार की घटनाएं होती हैं। हर रोज के अखबार ऐसी घटनाओं की खबरों से भरे होते हैं। इन्हीं के खिलाफ जनता का दबा हुआ गुस्सा सड़कों पर फूटा है। सरकार को उसे बल के द्वारा दबाने की बजाय समस्या का हल खोजने के गंभीर प्रयास करने चाहिए।
इससे पहले भाजपा ने महिलाओं के विरुद्ध जघन्य अपराधों को रोकने संबंधी प्रधानमंत्री के देश के नाम संदेश पर कहा कि वह जनता में विश्वास उत्पन्न नहीं कर पाया है।
पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री जनता के मन का वेग समझने में असफल रहे हैं। जनता कड़े कानून और समयबद्ध कार्रवाई चाहती है। प्रधानमंत्री का बयान यह बहुत देर से आया, बहुत कम भरोसा दिलाने वाला है।
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