केंद्र नहीं दे रहा सहयोग : ममता
ब्रिटेन-स्विट्जरलैंड जैसी कर संधि करेगा भारत
मीरा कुमार ने हर 37 दिन में की विदेश यात्रा
विवाह पंजीकरण 60 दिन में कराना जरूरी, वरना जुर्माना
ओरियंटल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा का समर्थन किया
80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी साइकिल!
मदेरणा, बिश्नोई ने भंवरी की हत्या की साजिश रची: सीबीआई
लोकपाल विधेयक प्रवर समिति को भेजने पर हंगामा
बीजेपी की आपत्ति के बीच लोकपाल बिल राज्यसभा में पेश
कांस्य युग में भी थीं सोशल नेटवर्किंग साइटें!
मोबाइल कंपनियां फैसले से अवाक, समीक्षा याचिका संभव
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:02-02-12 08:31 PM
Last Updated:03-02-12 01:33 AM
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सकते में आए नए दूरसंचार ऑपरेटरों ने संकेत दिया कि वे न्यायालय में पुनरीक्षा याचिका दायर कर सकते हैं। न्यायालय के 2008 में जारी 122 दूरसंचार लाइसेंस रद्द करने के फैसले पर इन कंपनियों ने आश्चर्य व्यक्त किया है।
जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किया जा सकता है उनमें यूनिनार (यूनिटेक) और नार्वे की टेलीनार का संयुक्त उद्यम, सिस्तेमा श्याम (श्याम टेलीकाम) और रूस की सिस्तेमा का संयुक्त उद्यम, वीडियोकान, लूप टेलीकाम, आइडिया सेल्यूलर, एतिसलात डीबी (डीबी रीयल्टी) और संयुक्त अरब अमीरात का संयुक्त उद्यम शामिल हैं।
सिस्तेमा-श्याम एमटीएस ब्रांड के तहत मोबाइल सेवा प्रदान करती है और यूनिटेट-टेलीनार संयुक्त उद्यम यूनिनार ब्रांड के तहत सेवा प्रदान करता है। इन कंपनियों ने देश भर में अपनी सेवा मुहैया कराने के लिए भारी निवेश किया है। एसएसटीएल ने एक बयान में कहा कि सिस्तेमा-श्याम अभी भी फैसले की पूरी प्रति का इंतजार कर रही है। कानून का पालन करने वाली कंपनी के तौर पर वह कहना चाहेगी कि उसके पास उपलब्ध न्यायिक समाधनों के जरिए अपने हितों की रक्षा का अधिकार है।
यूनिनार ने इस फैसले पर अचंभा जाहिर करते हुए कहा कि हमें उस गलती की सजा मिली है जो न्यायालय को सरकारी प्रक्रिया में मिली है। तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा ने जनवरी 2008 में 1,651 करोड़ रुपए में 2जी स्पेक्ट्रम के साथ नए लाइसेंस जारी किया था। सरकारी लेखा परीक्षक सीएजी ने कहा था कि इससे सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
अनुमान है कि इन लाइसेंस के रद्द होने से करीब 500 मेगाहर्टज का 2जी स्पेक्ट्रम खाली होगा, जिसकी नीलामी सरकार कर सकती है।
प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाता आइडिया सेल्यूलर ने कहा कि कंपनी सिर्फ इसलिए इस मामले में फंस गई कि उसे जनवरी 2008 में लाइसेंस मिला, जबकि आवेदन 18 महीने पहले किया था।
नार्वे की टेलीनार ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार कुछ सही कदम उठाएगी, जिससे हमारे कानूनी निवेश प्रभावित नहीं होगा। यूनिनार में टेलीनार की बहुलांश हिस्सेदारी है। सिस्तेमा-श्याम ने लाइसेंस खरीदने और सेवाएं शुरू करने पर अब तक 12,500 करोड़ रुपए का निवेश करने का दावा किया है।
जीएसएम परिचालकों के संगठन सीओएआई ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करता है। साथ ही यह भी जरूरी है कि सरकार इस क्षेत्र में हुए भारी निवेश के प्रति संवेदनशील रहे, हमें उम्मीद है कि संबद्ध पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर सरकार संतुलित रवैया अपनाएगी।
41

अन्य खबरें
टिप्पणियाँ
स्थानीय ख़बरें
एन सी आर
पंजाब
उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें
आज का मौसम राशिफल



ई-मेल

