चौटाला को मिली छह हफ्ते की जमानत
IPL स्पॉट फिक्सिंग मामले में विंदू दारा सिंह गिरफ्तार चेन्नई में सट्टेबाजी मामले में प्रमुख आरोपी गिरफ्तार आइगेट ने यौन उत्पीड़न केस में CEO को किया बर्खास्त इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की राजेश तलवार की याचिका भारत-चीन सीमा संबंधी मुद्दों का समाधान खोजने में सक्षम IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
IPL मैचों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
कलेक्टर की रिहाई के लिए होगी मध्यस्थों की बैठक
रायपुर, एजेंसी
First Published:25-04-12 03:48 PM
Last Updated:25-04-12 08:40 PM
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कलेक्टर की रिहाई के लिए राज्य सरकार के मध्यस्थों की बुधवार को राजधानी रायपुर में महत्वपूर्ण बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। वहीं राज्य सरकार ने माओवादियों द्वारा दिए गए मध्यस्थों के नामों को स्वीकृति दे दी है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के लिए राज्य सरकार की ओर से मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा का नाम तय किया गया है। आज शाम तक दोनों मध्यस्थों के साथ राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक होगी तथा बाद में मंत्रिमंडलीय उपसमिति के साथ मध्यस्थों की बैठक होगी जिससें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
अपनी मांगे मानने के लिए नक्सलियों द्वारा दी गई समय सीमा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि दोनों ओर से बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो रही है इसलिए अब समय सीमा तय करने का कोई औचित्य नहीं है।
इधर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव बैजेंद्र कुमार ने बताया कि माओवादियों द्वारा मध्यस्थता के लिए पूर्व अनुसूचित जाति आयुक्त बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल का नाम सामने आने के बाद राज्य के मुख्य सचिव सुनील कुमार ने बीडी शर्मा से बात कर कहा है कि राज्य शासन को उनके नाम पर कोई आपत्ति नहीं है।
वहीं शर्मा ने बताया कि उन्हें नक्सलियों की ओर से भी संदेश मिल गया है तथा वह इस मामले में मध्यस्थता करने को तैयार हैं।
कुमार ने बताया कि मध्यस्थता के लिए प्रोफेसर हरगोपाल का नाम सामने आने के बाद राज्य शासन प्रोफेसर हरगोपाल से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। राज्य सरकार को प्रोफेसर के नाम पर भी कोई आपत्ति नहीं है।
प्रोफेसर हरगोपाल ने कहा कि वह इस मामले में मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पहले माओवादियों की मांगों पर विचार किया जाएगा तथा आगे बात की जाएगी। प्रोफेसर ने कहा कि पिछले कई सालों से निर्दोष आदिवासी जेलों में बंद है उन्हें छुड़ाने के लिए भी राज्य सरकार से बातचीत की जाएगी।
इधर राज्य सरकार और कलेक्टर की पत्नी आशा मेनन की नजरें कलेक्टर मेनन के लिए दवा लेकर जंगल के भीतर गए आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम पर टिकी हुई है। कुंजाम मंगलवार दोपहर बाद कलेक्टर मेनन के लिए दवायें और जरूरी सामान लेकर रवाना हुए थे। कुंजाम के आज शाम तक वापस पहुंचने की उम्मीद है। कुंजाम की वापसी के बाद ही कलेक्टर मेनन की स्थिति के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी।
मेनन का माओवादियों ने शनिवार को मांझीपार गांव से उस समय अपहरण कर लिया था जब वे ग्राम सुराज अभियान के दौरान किसानों की बैठक ले रहे थे। इस दौरान माओवादियों ने उनके दो अंगरक्षकों की हत्या कर दी और उनके हथियार भी छीन लिए थे।
अपरहण के दूसरे दिन ही माओवादियों ने सरकार के सामने अपने आठ साथियों को छोड़ने समेत पांच मांगें रख दीं और इसके लिए उन्होंने आज 25 अप्रैल तक का समय दिया है। इस टना के बाद राज्य सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया जिसमें राज्य के गृहमंत्री ननकी राम कंवर, आदिमजाति कल्याण मंत्री केदार कश्यप, जल संसाधन मंत्री रामविचार नेताम तथा स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल शामिल है।
वहीं राज्य सरकार ने इस मामले को लेकर सोमवार की रात सर्वदलीय बैठक बुलाई थी जिसमें एक साझा अपील जारी की गई थी। राज्य सरकार ने इस समस्या के हल के लिए माओवादियों से बातचीत करने की बात कही थी।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद माओवादियों ने सोमवार रात ही संवाददाताओं को ई मेल संदेश भेज कर मध्यस्थता करने के लिए अपनी ओर से पूर्व अनसुचित जनजाति आयुक्त बीड़ी शर्मा, उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता प्रशांत भूषण और आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम के नाम का प्रस्ताव रखा था। बाद में प्रशांत भूषण और मनीष कुंजाम ने मध्यस्थता करने से इंकार कर दिया तब माओवादियों ने प्रोफेसर हरगोपाल का नाम आगे बढ़ाया।
वहीं राज्य सरकार ने मेनन की रिहाई की मध्यस्थता के लिए मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा का नाम आगे बढ़ाया है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के लिए राज्य सरकार की ओर से मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा का नाम तय किया गया है। आज शाम तक दोनों मध्यस्थों के साथ राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक होगी तथा बाद में मंत्रिमंडलीय उपसमिति के साथ मध्यस्थों की बैठक होगी जिससें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
अपनी मांगे मानने के लिए नक्सलियों द्वारा दी गई समय सीमा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि दोनों ओर से बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो रही है इसलिए अब समय सीमा तय करने का कोई औचित्य नहीं है।
इधर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव बैजेंद्र कुमार ने बताया कि माओवादियों द्वारा मध्यस्थता के लिए पूर्व अनुसूचित जाति आयुक्त बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल का नाम सामने आने के बाद राज्य के मुख्य सचिव सुनील कुमार ने बीडी शर्मा से बात कर कहा है कि राज्य शासन को उनके नाम पर कोई आपत्ति नहीं है।
वहीं शर्मा ने बताया कि उन्हें नक्सलियों की ओर से भी संदेश मिल गया है तथा वह इस मामले में मध्यस्थता करने को तैयार हैं।
प्रोफेसर हरगोपाल ने कहा कि वह इस मामले में मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पहले माओवादियों की मांगों पर विचार किया जाएगा तथा आगे बात की जाएगी। प्रोफेसर ने कहा कि पिछले कई सालों से निर्दोष आदिवासी जेलों में बंद है उन्हें छुड़ाने के लिए भी राज्य सरकार से बातचीत की जाएगी।
इधर राज्य सरकार और कलेक्टर की पत्नी आशा मेनन की नजरें कलेक्टर मेनन के लिए दवा लेकर जंगल के भीतर गए आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम पर टिकी हुई है। कुंजाम मंगलवार दोपहर बाद कलेक्टर मेनन के लिए दवायें और जरूरी सामान लेकर रवाना हुए थे। कुंजाम के आज शाम तक वापस पहुंचने की उम्मीद है। कुंजाम की वापसी के बाद ही कलेक्टर मेनन की स्थिति के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी।
मेनन का माओवादियों ने शनिवार को मांझीपार गांव से उस समय अपहरण कर लिया था जब वे ग्राम सुराज अभियान के दौरान किसानों की बैठक ले रहे थे। इस दौरान माओवादियों ने उनके दो अंगरक्षकों की हत्या कर दी और उनके हथियार भी छीन लिए थे।
अपरहण के दूसरे दिन ही माओवादियों ने सरकार के सामने अपने आठ साथियों को छोड़ने समेत पांच मांगें रख दीं और इसके लिए उन्होंने आज 25 अप्रैल तक का समय दिया है। इस टना के बाद राज्य सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया जिसमें राज्य के गृहमंत्री ननकी राम कंवर, आदिमजाति कल्याण मंत्री केदार कश्यप, जल संसाधन मंत्री रामविचार नेताम तथा स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल शामिल है।
वहीं राज्य सरकार ने इस मामले को लेकर सोमवार की रात सर्वदलीय बैठक बुलाई थी जिसमें एक साझा अपील जारी की गई थी। राज्य सरकार ने इस समस्या के हल के लिए माओवादियों से बातचीत करने की बात कही थी।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद माओवादियों ने सोमवार रात ही संवाददाताओं को ई मेल संदेश भेज कर मध्यस्थता करने के लिए अपनी ओर से पूर्व अनसुचित जनजाति आयुक्त बीड़ी शर्मा, उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता प्रशांत भूषण और आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम के नाम का प्रस्ताव रखा था। बाद में प्रशांत भूषण और मनीष कुंजाम ने मध्यस्थता करने से इंकार कर दिया तब माओवादियों ने प्रोफेसर हरगोपाल का नाम आगे बढ़ाया।
वहीं राज्य सरकार ने मेनन की रिहाई की मध्यस्थता के लिए मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा का नाम आगे बढ़ाया है।
10

टिप्पणियाँ
स्थानीय ख़बरें
एन सी आर
पंजाब
उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें
आज का मौसम राशिफल



ई-मेल
