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रिहा हुए डीएम का इंतजार
रायपुर, एजेंसी
First Published:03-05-12 03:56 PM
Last Updated:03-05-12 06:17 PM
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन 13 दिनों तक माओवादियों के कब्जे में रहने के बाद गुरुवार को रिहा हो गए। कलेक्टर मेनन को लेने माओवादियों के मध्यस्थ ताड़मेटला गांव के लिए रवाना हुए थे। यहां नक्सलियों के सहयोगी मध्यस्थों को अपने साथ जंगल के भीतर ले गए हैं।
      
सुकमा जिले से मिली जानकारी के अनुसार माओवादियों के मध्यस्थ बीडी शर्मा और हरगोपाल आज हेलिकाप्टर द्वारा रायपुर से चिंतलनार पहुंचे। इसके बाद वे जीप से ताड़मेटला गांव के करीब तक पहुंचे थे। इसके बाद माओवादियों के सहयोगियों ने शर्मा और हरगोपाल को अपने साथ पैदल जंगल की ओर ले गए। इस दौरान मीडिया को वहीं रोक दिया गया।
      
मुख्यमंत्री रमन सिंह के प्रमुख सचिव एन बैजेंद्र कुमार ने बताया कि माओवादियों की ओर से मध्यस्थ बीडी शर्मा और प्रोफेसर हरगोपाल ताड़मेटला के करीब पहुंच गए हैं। कुमार ने बताया कि कलेक्टर की रिहाई के बाद उन्हें जंगल से निकालने के लिए राज्य शासन ने पूरी व्यस्था कर ली है।

राज्य के सुकमा, दंतेवाड़ा, जगदलपुर और राजधानी रायपुर में चिकित्सा अधिकारियों को तैयार रहने के लिए कहा गया है। कलेक्टर मेनन की रिहाई के बाद उनका चिकित्सकीय परीक्षण किया जाएगा। चिंतलनार क्षेत्र में भी एक एम्बुलेंस को तैनात किया गया है।
      
कुमार ने बताया कि संभवत: कलेक्टर मेनन रिहा होने के बाद सबसे पहले अपनी पत्नी आशा मेनन से मिलना चाहेंगे। मेनन को सुकमा पहुंचाने की भी पूरी व्यवस्था कर ली गई है।

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन का माओवादियों ने पिछले महीने की 21 तारीख को अपहरण कर लिया था तथा इस दौरान उनके दो सुरक्षा कर्मियों को गोली मार दी थी। इस घटना को अंजाम देने के बाद माओवादियों ने राज्य सरकार से अपने 17 साथियों को रिहा करने समेत पांच मांगे सामने रख दी थी।

माओवादियों ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को 25 अप्रैल तक का समय दिया था। लेकिन बाद में माओवादियों ने अपने एक संदेश में आठ कार्यकताओं को रिहा करने की मांग कर दी थी। इसके लिए राज्य सरकार को दो मई तक का वक्त दिया गया था।
      
इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार की ओर से मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव एसके मिश्रा तथा माओवादियों की ओर से पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बीडी शर्मा और हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हरगोपाल ने मध्यस्थ के रूप में पांच दौर की लंबी बातचीत की थी।

बाद में राज्य सरकार और माओवादियों के मध्यस्थों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया जिसके तहत राज्य में वर्षों से जेलों में बंद आदिवासियों के मामले की जांच और सुनवाई के लिए एक उच्चाधिकार समिति का बनाने का फैसला किया गया है।
      
मंगलवार की शाम माओवादियों ने संवाददाताओं को संदेश भेजकर कलेक्टर मेनन को आज गुरूवार को रिहा करने की बात कही थी।

 
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