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सूर्यास्त के बाद महिलाओं को गिरफ्तार नहीं करे पुलिस: कोर्ट
मुंबई, एजेंसी
First Published:26-12-12 09:42 AM
सूर्यास्त के बाद एक महिला को पकड़ने और गिरफ्तार करने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक और नगर पुलिस आयुक्त को कहा कि वह तमाम पुलिस थानों को ये निर्देश जारी करें कि सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं करें या हिरासत में नहीं लिया जाए।
न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति शिंदे की खंडपीठ ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक और नगर पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे दो हफ्तों में निर्देश जारी कर तमाम पुलिस अधिकारियों को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 64 (4) का पालन करें, जिसमें अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़ कर किसी भी अपराध में आरोपित किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार करने से मना किया गया है।
इस धारा के अनुसार, अगर पुलिस सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी महिला को गिरफ्तार करना चाहती है तो उसके लिए उसे किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट से पूर्व अनुमति लेनी पड़ेगी जिसके अधिकार क्षेत्र में अपराध हुआ है या गिरफ्तारी की जानी है।
अदालत ने यह निर्देश भारती खंदहार की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई के क्रम में जारी किया। भारती को इलाहाबाद की एक अदालत की ओर से जारी एक गैर-जमानती वारंट के क्रम में माटुंगा पुलिस थाने ने गिरफ्तार किया था।
भारती को 13 जून 2007 को पुलिस उप निरीक्षक मारूति जाधव ने गिरफ्तार किया था। उसे माटुंगा पुलिस थाना लाया गया जहां उसे तीन घंटा बैठाया गया। उसके बाद एक अन्य पुलिस उपनिरीक्षक अनंत गुराव ने भारती की गिरफ्तारी दिखाने के लिए कागजी कार्रवाई की।
उसे दूसरे दिन एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिसने उसे जमानत पर रिहा कर दिया। रिहाई के बाद भारती ने थाना में अवैध रूप से रोके जाने और गिरफ्तारी पर जाधव और गुराव के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस आयुक्त को पत्र लिखे।
जब भारती को पुलिस आयुक्त से कोई जवाब नहीं आया तो उसने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति शिंदे की खंडपीठ ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक और नगर पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे दो हफ्तों में निर्देश जारी कर तमाम पुलिस अधिकारियों को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 64 (4) का पालन करें, जिसमें अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़ कर किसी भी अपराध में आरोपित किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार करने से मना किया गया है।
इस धारा के अनुसार, अगर पुलिस सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी महिला को गिरफ्तार करना चाहती है तो उसके लिए उसे किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट से पूर्व अनुमति लेनी पड़ेगी जिसके अधिकार क्षेत्र में अपराध हुआ है या गिरफ्तारी की जानी है।
अदालत ने यह निर्देश भारती खंदहार की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई के क्रम में जारी किया। भारती को इलाहाबाद की एक अदालत की ओर से जारी एक गैर-जमानती वारंट के क्रम में माटुंगा पुलिस थाने ने गिरफ्तार किया था।
भारती को 13 जून 2007 को पुलिस उप निरीक्षक मारूति जाधव ने गिरफ्तार किया था। उसे माटुंगा पुलिस थाना लाया गया जहां उसे तीन घंटा बैठाया गया। उसके बाद एक अन्य पुलिस उपनिरीक्षक अनंत गुराव ने भारती की गिरफ्तारी दिखाने के लिए कागजी कार्रवाई की।
उसे दूसरे दिन एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिसने उसे जमानत पर रिहा कर दिया। रिहाई के बाद भारती ने थाना में अवैध रूप से रोके जाने और गिरफ्तारी पर जाधव और गुराव के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस आयुक्त को पत्र लिखे।
जब भारती को पुलिस आयुक्त से कोई जवाब नहीं आया तो उसने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
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