मंगलवार, 21 मई, 2013 | 13:10 | IST
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स्तुति से अलग हुई और दुनिया छोड़ गई आराधना
बैतूल, एजेंसी
First Published:06-07-12 02:33 PM
Last Updated:06-07-12 04:43 PM
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जीवन के 353 दिन स्तुति-आराधना ने साथ-साथ गुजारे, मगर वे अलग-अलग सिर्फ 15 दिन ही रह पाईं। लगता है कि आराधना को अपनी बहन स्तुति से अलग होना रास नही आया और वह दुनिया को ही छोड़ गई।

मध्य प्रदेश के चिचोली ब्लाक अंतर्गत चूडिया ग्राम निवासी माया यादव ने दो जुलाई, 2011 को जुड़वा बेटियों को पाढ़र अस्पताल में जन्म दिया था। दोनो बेटियां आपस में जुड़ी हुई थीं। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते यादव दंपत्ति ने अपनी दोनों बेटियों को पाढर मिशन अस्पताल को दान कर दिया था।

पाढर अस्पताल ने दोनों जुड़ी हुई बहनों को स्वीकार कर उनका पालन कर उन्हें स्तुति-आराधना नाम दिया। चिकित्सालय प्रबंधन ने उन्हें अलग करने के लिए प्रयास शुरू किए। इसके लिए देश-विदेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों से सम्पर्क किया गया।

चिकित्सकों के बीच समन्वय के बाद 20 जून, 2012 को 22 चिकित्सकों के दल ने अपने सहयोगियों की मदद से एक बड़ा ऑपरेशन कर दोनों बहनों स्तुति-आराधना को अलग करने में सफलता हासिल की। लगभग 10 घंटे चले ऑपरेशन के बाद दोनों की स्थिति नियंत्रण में थी।

चिकित्सक डॉक्टर राजीव चौधरी बताते हैं कि स्तुति-आराधना को शुरुआत में वैंटिलेटर पर रखा गया। स्तुति की हालत तेजी से सुधरी और उसे जल्दी ही वैंटिलेटर से हटा लिया गया।

वहीं आराधना वैंटिलेटर से हटी मगर जल्दी ही उसी स्थिति में लौट आई। उसे बुखार आया और फिर सैप्टीसीनिया हो गया। गुरुवार को दो बार दोपहर में दिल का दौरा पड़ा और रात को उसने अंतिम सांस ली।

स्तुति-आराधना जब शरीर जुड़ी थीं, तब दोनों की खिलखिलाहट और चंचलता हर किसी का मनमोह लेती थी। ऑपरेशन से पहले दोनों की चंचलता सभी को लुभाती थी। मगर अलग होने के बाद आराधना के चेहरे पर वह खुशी नजर नहीं आई।

उसे देखकर यही लगता था मानो वह स्तुति से अलग होकर खुश नहीं है। स्तुति को जब भी आराधना के बिस्तर के करीब ले जाया जाता तो वह उसे छूने की कोशिश करती थी मगर आराधना गुमसुम पड़ी रहती थी।

स्तुति-आराधना के सफलता पूर्वक हुए ऑपरेशन के बाद से अस्पताल परिसर में खुशी का माहौल था और दो जुलाई को उनका जन्मदिन भी मनाया गया था। इस समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए थे ।

स्तुति जहां लोगों की गोद मे थी, वहीं आराधना बिस्तर पर बनी रही। आराधना की मौत की खबर से हर कोई दुखी है। पाढर अस्पताल में हर कोई गमजदा है। आराधना की आत्मा की शांति के लिए शुक्रवार को विशेष प्रार्थना सभा हुई।

साथ ही सभी ने स्तुति की सेहत दुरुस्त रखने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उसके बाद गमगीन माहौल में आराधना के शव को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

डॉक्टर चौधरी का कहना है कि आराधना की सेहत को दुरुस्त रखने के हर सम्भव प्रयास किए गए और ऑपरेशन से पहली बनाई गई योजना के मुताबिक आवश्यक कदम उठाए गए, मगर ईश्वर को जो मंजूर था वही हुआ।

 
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