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मृत्युदंड बलात्कारियों को नहीं रोक सकता: एमनेस्टी
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:22-12-2012 05:00:51 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशल के प्रथम भारतीय प्रमुख ने कहा है कि दिल्ली में एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार के खिलाफ उमड़े आक्रोश को समझा जा सकता है, लेकिन फांसी की सजा इस अपराध का जवाब नहीं है।

एमनेस्टी के ज्यादातर सदस्य उत्तर अमेरिका व यूरोप में हैं। इक्यावन वर्षीय सलिल शेट्टी ने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत, ब्राजील व दक्षिण अफ्रीका जैसे विकासशील देशों के लोग भी इससे जुड़ें।

संगठन के महासचिव शेट्टी ने एक साक्षात्कार में आईएएनएस से कहा, ''23 वर्षीया युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की यह घटना खतरे की घंटी है।'' उन्होंने कहा, ''इस पर आक्रोश होना अच्छा है। इस पर गुस्सा भी जायज है।''

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि फांसी की सजा बलात्कार सहित किसी भी प्रकार के अपराध को रोक पाती है।

उन्होंने कहा, ''इसका सबसे ताजा उदाहरण अमेरिका के स्कूल में हुई गोलीबारी है। अमेरिका पश्चिम के उन कुछ देशों में शामिल है, जहां अब भी मौत की सजा दी जाती है लेकिन क्या इससे वहां अपराध रुके हैं।''

शेट्टी ने कहा, ''इसके विपरीत अमेरिका के जिन राज्यों में मृत्युदंड की सजा को हटा दिया गया है, वहां अपराधों में कमी आई है। कनाडा के मामले में भी ऐसा ही है।''

दुनिया के सबसे पुराने मानवाधिकार संगठनों में से एक एमनेस्टी के विश्वभर में 3० लाख सदस्य हैं। यह संगठन किसी भी अपराध के लिए मृत्युदंड का विरोध करता है।

शेट्टी ने कहा, ''मृत्युदंड को जायज नहीं ठहराया जा सकता। गुस्से के आधार पर तुरंत मृत्युदंड पर फैसला नहीं लिया जा सकता।''

उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में इस तरह की घटनाएं होने की प्रमुख वजह वहां की आपराधिक न्याय प्रणाली का कमजोर होना है। शेट्टी ने कहा कि यह जानना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि बलात्कार के पीछे के कारण क्या थे और बलात्कार व अन्य अपराधों से निपटने के लिए कानूनी व न्यायिक प्रणाली में कौनसी कमियां हैं।

 
 
 
 
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