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मीडिया रिपोर्टिंग पर कोई दिशा-निर्देश नहीं: एससी
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:11-09-12 01:49 PM
Last Updated:11-09-12 02:44 PM
सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने मंगलवार को कहा कि न्यायालय के अधीन मामलों की मीडिया रिपोर्टिंग के नियमन के लिए कोई मुकम्मल दिशा-निर्देश नहीं हो सकता, लेकिन खास मामलों में पाबंदी लगाए जाने की मांग की जा सकती है।
प्रधान न्यायाधीश एसएच कपाडिया की अध्यक्षता वाली एक संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि न्यायालयाधीन मामलों की रिपोर्टिंग के लिए कोई दिशा-निर्देश तय नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि हालांकि कोई भी संतृप्त व्यक्ति अपने मामले की सुनवाई की रिपोर्टिंग करने से मीडिया को रोकने के लिए किसी उपयुक्त अदालत में जा सकता है।
न्यायालय ने कहा कि भारतीय संविधान के तहत मीडिया रिपोर्टिंग सहित अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार कोई पूर्ण अधिकार नहीं है और यह वर्गीकरण व औचित्य की जांच पर निर्भर करता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह का कोई भी दिशा-निर्देश अल्पकालिक होगा और यह अनिवार्यता व अनुरूपता के सिद्धांत पर निर्भर करेगा।
न्यायालय ने कहा कि संतृप्त वादी अलग-अलग मामलों में सुप्रीम कोर्ट या किसी हाईकोर्ट जाकर आदेश या स्थगन की मांग कर सकता है, जिसमें किसी खास मामले में एक सीमित अवधि के लिए मीडिया को रिपोर्टिंग करने से रोका जा सकता है। न्यायालय ने कहा कि यह आदेश निवारक होगा, दंडात्मक नहीं।
न्यायालय ने आगे कहा कि यह केवल न्यायालय की अवमानना के मामलों से मीडिया कर्मियों को बचाने के लिए है। न्यायालय ने कहा कि मीडिया के रिपोर्टिंग के अधिकार और वादी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को संतुलित करने के लिए ये निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(2)
सुधर्म धन्य न्याय श्रेष्ठ ; कोटिशः धन्यवाद ! चौथे स्तम्भ की स्वतंत्रता बनाए रखने हेतु !! एवं शत सहानुभूति !!! न्याय स्तम्भ की स्वतंत्रता ; 'येन - केन' करके बचाने हेतु !!!!!
By sanjay tripathi (11th-September-2012 08:03:PM)
पत्रकारों को अपनी लक्ष्मण रेखा खुद समझनी होगी -सर्वोच्च न्यायलय
लक्ष्मण रेखा तय करने का अधिकार नेताओं के पास है ,नौकशाहों और पुलिस के पास है , न्यायधीशों के पास है , बड़े बड़े कॉरपोरेट के पास है अर्थात सत्ता से जुड़े हर व्यक्ति ,हर संस्था के पास है अपनी लक्ष्मण रेखा तय करने का अधिकार और भ्रष्ट मीडिया के पास तो खुला लाइसेंस है कुछ भी बोलने /लिखने / दिखाने का चाहे वो कितना ही बड़ा झूठ हो अनर्गल हो,अमर्यादित हो और देश के हितों के खिलाफ हो ये अधिकार अगर किसी के पास नहीं है तो वो है 'वी ,द पीपल' जिनके नाम पर बने संविधान की आड़ लेकर ये भेड़िये आम आदमी का खून चूसते हैं ,उसका हक़ छीनते हैं और उसे देशद्रोही ठहराते हैं
संक्षेप में -' लक्ष्मण की रेखा रावण के नियंत्रण में '
By kuldeep sehdev (11th-September-2012 05:34:PM)
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