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फेसबुक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:30-11-12 01:07 PMLast Updated:30-11-12 02:10 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को शुक्रवार को निर्देश दिया कि वह उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताए जिसके तहत पुलिस ने ठाणे जिले के पालघर से दो लड़कियों को गिरफ्तार किया था।

दोनों लड़कियों को बाल ठाकरे के अंतिम संस्कार के दिन 18 नवम्बर के मुंबई बंद को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर और न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया जाता है कि उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताए जिसके तहत दो लड़कियों शाहीन ढाडा और रीनू श्रीनिवासन को फेसबुक पर टिप्पणी करने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

पीठ ने दिल्ली की छात्रा श्रेया सिंघल की जनहित याचिका पर राज्य सरकार से चार हफ्ते के अंदर जवाब दायर करने को कहा। पीठ ने पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी सरकार को भी इसमें पक्ष बनाया है जहां विगत दिनों ऐसी ही घटनाएं हुई थीं।

साथ ही दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया और चार हफ्ते के अंदर उनसे जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की सुनवाई छह हफ्ते बाद तय की। अदालत ने अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती से भी सहयोग मांगा।

वाहनवती ने कहा कि कृपया सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66ए की जांच करें और इस मुद्दे पर मैं अदालत का सहयोग करूंगा।

अटार्नी जनरल (एजी) ने उन दिशा-निर्देशों का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि आईटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज मामलों पर निर्णय वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को करना है। ग्रामीण इलाकों के मामले पर निर्णय डीजीपी स्तर के अधिकारियों और शहरी इलाकों के मामले पर निर्णय आईजीपी को करना है।

एजी ने कहा कि ऐसा थाना प्रमुखों द्वारा नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले पर अदालत को विचार करने की आवश्यकता है। बहरहाल, श्रेया की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत से निर्देश देने का आग्रह किया कि देश भर में ऐसे मामले तब तक दर्ज नहीं किए जाएं जब तक ऐसी शिकायतों पर संबंधित राज्य के डीजीपी गौर न करें और उसे मंजूरी नहीं दें।

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मुंबई की दो लड़कियों की गिरफ्तारी उचित नहीं है। रोहतगी ने कहा कि आईटी अधिनियम के जिस प्रावधान के तहत गिरफ्तारी की शक्तियां दी जाती हैं वे पूरी तरह असंवैधानिक हैं और उन्हें हटाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रावधान असंवैधानिक हैं। निश्चित तौर पर इस पर सुप्रीम कोर्ट को निर्णय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को निर्देश दिया जाना चाहिए कि इस प्रावधान के तहत कोई मामला तब तक दर्ज नहीं किया जाए जब तक कि संबंधित राज्य के डीजीपी की इस पर मंजूरी नहीं मिल जाए। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य का विषय है और जब तक इस अदालत से कोई आदेश पारित नहीं होता, यह (प्रावधान का दुरुपयोग) नहीं रुक सकता।

रोहतगी ने कहा कि देश में हजारों थाने हैं और इसलिए इस अदालत से आदेश पारित किए जाने की आवश्यकता है। इस पर अदालत ने कहा कि सभी थाने एक जैसे नहीं हैं। इस बीच कुछ और नागरिक अधिकार समूहों और गैर सरकारी संगठनों ने अदालत से कहा कि उन्हें भी इस मुददे पर सुनवाई की जारी प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए।

पक्ष बनाने का आग्रह करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि न केवल एक धारा बल्कि अधिनियम के कई अन्य प्रावधान और नियम असंवैधानिक हैं। रोहतगी ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को पक्ष बनने की अनुमति दी जाती है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

आईटी अधिनियम में संशोधन के लिए जनहित याचिका पर सहमत होते हुए पीठ ने गुरुवार को कहा था कि जिस तरीके से बच्चों को गिरफ्तार किया गया, उससे देश के लोगों की भावनाएं आहत हुईं। जिस तरीके से ये चीजें हुईं उन पर विचार किए जाने की जरूरत है।

याचिकाकर्ता श्रेया ने अपनी याचिका में कहा कि आईटी एक्ट 2000 की धारा 66ए के प्रावधान काफी व्यापक और जटिल हैं और वस्तुनिष्ठ मानकों पर आंके जाने में अक्षम हैं। इससे इसके दुरुपयोग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

श्रेया ने अपनी याचिका में मुंबई की दो लड़कियों की गिरफ्तारी के अलावा पश्चिम बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्र की गिरफ्तारी का भी जिक्र किया है जिन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट पर राजनीतिक कार्टून पोस्ट किया था।

उसने पुडुचेरी पुलिस द्वारा इस वर्ष अक्टूबर में रवि श्रीनिवासन की गिरफ्तारी का भी जिक्र किया है जिन्होंने टि्वटर पर तमिलनाडु के एक नेता के खिलाफ आरोप लगाए थे। इसमें इस वर्ष मई में एयर इंडिया के कर्मचारियों वी जगन्नाथ राव और मयंक शर्मा की मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का भी जिक्र किया गया है।

 
 
 
 
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