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रिहा होंगे पाकिस्तानी वायरोलॉजिस्ट खलील चिश्ती
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:12-12-12 02:18 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पाकिस्तानी वायरोलॉजिस्ट (वायरस एवं इससे होने वाली बीमारियों के विशेषज्ञ) मोहम्मद खलील चिश्ती को रिहा करने के आदेश दिए हैं। उन्हें वर्ष 1992 में एक हत्या के सिलसिले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति पी सतशिवम और रंजन गोगोई की पीठ ने कहा कि चिश्ती एक साल चार महीने की सजा भुगत चुके हैं और यह काफी है। निर्णय सुनाते हुए न्यायमूर्ति सतशिवम ने कहा कि चिश्ती बिनी किसी प्रतिबंध के अपने देश जाने के लिए स्वतंत्र हैं।

चिश्ती की उम्र और योग्यता को देखते हुए न्यायालय ने सम्बद्ध सरकारी विभाग को उन्हें बिना किसी परेशानी के पाकिस्तान भेजना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने अपने पंजीकरण कार्यालय को भी ब्याज सहित पांच लाख रुपये चिश्ती को लौटाने के निर्देश दिए, जो उन्होंने मई, 2012 के आदेश के बाद जमा कराए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को चिश्ती को पाकिस्तान के कराची में अपने घर जाने की अनुमति दी थी। उस वक्त उनकी अपील लम्बित थी। इसके बाद वह जल्द ही अजमेर लौट गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने नौ अप्रैल को उन्हें जमानत दी थी। करीब 18 वर्ष चले मुकदमे के बाद उन्हें वर्ष 2010 में हत्या का दोषी करार दिया गया था।

चिश्ती को अप्रैल 1992 में अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर नमाज के दौरान झगड़े में एक व्यक्ति को जान से मार दिए जाने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

 

 
 
 
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