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राज्य सभा में खूब लगे नारे, कार्यवाही स्थगित
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:10-12-12 02:38 PMLast Updated:10-12-12 03:58 PM
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भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए वॉलमार्ट द्वारा लाबिंग में धन खर्च किए जाने संबंधी खबरों पर विपक्ष के भारी हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार तक लिए स्थगित कर दी गयी है।

भाजपा, वाम दल, तृणमूल कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, जदयू, अगप, शिवसेना तथा सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सपा के सदस्यों ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से सफाई देने और एफडीआई संबंधी निर्णय पर रोक लगाने की मांग की।

भाजपा के रविशंकर प्रसाद ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज कई समाचार पत्रों में खबर आयी है कि बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेश निवेश (एफडीआई) के लिए लाबिंग के मकसद से 125 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि वॉलमार्ट ने अमेरिकी सीनेट की एक समिति में यह स्वीकार किया है कि उसने भारत में खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के मकसद से लाबिंग के मकसद से वर्ष 2012 में तीस लाख अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं।

प्रसाद ने कहा कि यह पूरी तरीके से रिश्वत है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह रिश्वत किसको दी गयी। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले की जांच करनी चाहिए और तब तक एफडीआई संबंधी निर्णय पर रोक लगा देनी चाहिए।

प्रसाद द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के फौरन बाद भाजपा और वाम दल सहित कई विपक्षी सदस्य इस मामले में प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग करने लगे। इस पर उपसभापति पीजे कुरियन ने कहा कि वह जवाब देने के लिए सरकार को निर्देश नहीं दे सकते।

इसी मुद्दे पर खुद को संबद्ध करते हुए माकपा के पी राजीव ने कहा कि सरकार को इस मामले में स्वतंत्र जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी भी खबरें आयी हैं कि फेमा कानून में संशोधन से पहले ही वॉलमार्ट ने भारत में निवेश कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में भी जवाब देना चाहिए।

भाकपा के डी राजा ने कहा कि उनकी पार्टी के सांसद एमपी अच्युतन ने इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे की व्यापक जांच करायी जानी चाहिए। हंगामे के बीच संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने सदन को आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे को संबद्ध मंत्री के संज्ञान में लाएंगे। लेकिन उनके इस आश्वासन का कोई असर नहीं हुआ और विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा।

हंगामा थमते नहीं देख कुरियन ने बैठक दोपहर 12 बजकर करीब 25 मिनट पर 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। बैठक फिर शुरू होने पर विपक्षी सदस्य ने प्रधानमंत्री से जवाब मांगते हुए दोबारा हंगामा शुरू कर दिया। इस पर कुरियन ने कहा कि हर किसी बात के लिए प्रधानमंत्री द्वारा जवाब दिया जाना जरूरी नहीं है और न ही वह रोज सदन में आ सकते हैं।

इसी बीच सपा के सदस्य सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मियों को प्रोन्नति में आरक्षण के विरोध में नारेबाजी करते हुए आसन के समक्ष आ गए। कुरियन ने सपा सदस्यों से कहा कि संबंधित विधेयक पर अभी विचार नहीं हो रहा है और इस समय शून्यकाल के तहत मुद्दे उठाए जा रहे हैं। लिहाजा उन्हें सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करनी चाहिए, लेकिन उनकी इस अपील का कोई असर नहीं हुआ। हंगामा थमते नहीं देख कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

 
 
 
 
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