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भागवत ने छोड़ा एक और तीर, शादी को बताया करार
इंदौर, एजेंसी First Published:06-01-2013 04:23:02 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपनी टिप्पणियों से एक और नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि पति की देखभाल के लिए महिला उसके साथ एक करार से बंधी होती है। कुछ दिन पहले उन्होंने यह कहकर विवाद खड़ा किया था कि बलात्कार जैसी घटनाएं ग्रामीण भारत में नहीं, बल्कि शहरी भारत में होती हैं।

भागवत ने एक रैली में कहा कि पति और पत्नी के बीच एक करार होता है जिसके तहत पति का यह कहना होता है कि तुम्हें मेरे घर की देखभाल करनी चाहिए और मैं तुम्हारी सभी जरूरतों का ध्यान रखूंगा। उन्होंने कहा कि इस तरह पति करार के नियमों का पालन करता है। जब तक पत्नी करार का पालन करती है, पति उसके साथ रहता है। यदि पत्नी करार का उल्लंघन करती है तो वह उसे त्याग सकता है।

भागवत की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए माकपा नेता वृंदा करात ने कहा कि मुझे यह आश्चर्यजनक नहीं लगता क्योंकि आखिरकार वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से ही हैं। मैं सोचती हूं कि यह भारत की पिछड़ी सोच वाली समिति है। ये वही तत्व हैं जो भाजपा के शासनकाल में मनुस्मृति के आधार पर भारत का नया संविधान चाहते थे। इसलिए वे जब भी इस भाषा में बात करते हैं तो वे सिर्फ अपनी विचारधारा दर्शाते हैं।

आरएसएस प्रवक्ता राम माधव ने कहा कि विवाह के बारे में भागवत के विचारों को भारतीय परिप्रेक्ष्य में पूरी तरह गलत ढंग से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके विचारों को पूरी तरह गलत ढंग से पेश किया जा रहा है। उन्होंने (भागवत) कहा था कि पश्चिमी वैवाहिक व्यवस्था एक करार होती है जहां स्त्री-पुरुष शादी को एक समझौते के रूप में मानते हैं, जबकि उनके (भागवत) कहने का मतलब यह था कि भारतीय विवाह व्यवस्था बहुत ही पवित्र संस्था है।

 
 
 
 
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