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आनंद शर्मा ने ओबामा के बयान का दिया जवाब
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:16-07-12 07:35 PM
Last Updated:16-07-12 09:00 PM
नीति निर्माण को देश का संप्रभु अधिकार बताते हुये वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने सोमवार को कहा कि ओबामा प्रशासन को पहले अमेरिका में संरक्षणवाद और व्यापार प्रतिबंधों को दूर करना चाहिये।
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की इस टिप्पणी कि भारत में आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया जाना चाहिये, शर्मा ने कहा उन्हें (ओबामा को) अपनी सोच को बताने का अधिकार है लेकिन जहां तक नीति निर्माण की बात है यह हमारा संप्रभु अधिकार है और भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति को लेकर माहौल निवेशकों के अनुकूल है।
ओबामा ने कहा था कि भारत में खुदरा क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश पर प्रतिबंध है। इस स्थिति को देखते हुये उन्होंने भारत में आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने का एक और दौर शुरू करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा था कि भारत में खुदरा क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों में निवेश करना अभी भी काफी मुश्किल है, ऐसे कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश या तो सीमित रखा गया है या फिर इस पर प्रतिबंध है, जबकि निरंतर वृद्धि हासिल करने के लिये यह भारत के लिये जरूरी है।
शर्मा ने इसके जवाब में कई रिपोर्टों का हवाला देते हुये कहा कि भारत में ज्यादातर क्षेत्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिये खुले हैं और भारत विदेशी निवेश के लिये आकर्षक स्थल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संकेतक बताते है, विभिन्न नीतिगत उपायों, सुधारों, सरलीकरण, नीतियों को तर्कसंगत बनाने से हमने देश में जो परिवेश बनाया है। आर्थिक सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ते हुये हमने सोची समक्षी नीति को अपनाया है।
शर्मा ने कहा इसके साथ ही ऐसे समय जब अमेरिका में रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं कई भारतीय कंपनियों ने अमेरिका सहित कई देशों में बड़ा निवेश किया है और पांच लाख से अधिक रोजगार सजित किये हैं।
उन्होंने कहा कि हम अमेरिका से कहना चाहेंगे कि वह प्रतिबंधों को कम करने में अग्रणी भूमिका निभाये, व्यापार और पूंजी प्रवाह को बढ़ावा दे जो कि दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं के लिये अच्छा होगा। अमेरिका को संरक्षणवाद के खिलाफ लड़ाई तेज करनी चाहिये और विश्व व्यापार संगठन की रुकी पड़ी दोहा दौर की विकास वार्ता को सफल बनाने के लिये आगे आना चाहिये।
अमेरिका में वीजा फीस बढ़ाये जाने और कई संरक्षणवादी उपायों का भारतीय उद्योग जगत विरोध करता रहा है। भारत सरकार ने भी कई मौकों पर ऐसे संरक्षणवादी उपायों का विरोध किया। बीजा फीस बढ़ाये जाने से भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों का कामकाज प्रभावित हुआ।
शर्मा ने कहा कि बात जब और फैसले लेने की आती है प्रधानमंत्री ने और मैंने भी कहा है कि हम आर्थिक सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिये प्रतिबद्ध हैं। सुधारों को बढ़ाने के लिये हम वचनबद्ध हैं। हम आकर्षक निवेश स्थल हैं और आगे भी बने रहेंगे।
हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार सभी के साथ विचार विमर्श के बाद ही निर्णय लेती है। सुधारों की धीमी गति को लेकर सरकार उद्योग और विदेशी निवेशकों के एक वर्ग के निशाने पर रही है। विशेषतौर पर बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई अनुमति पर नवंबर 2011 के मंत्रिमंडल के फैसले को सरकार अपने ही एक सहयोगी दल के विरोध के कारण लागू नहीं कर पाई।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(1)
ओबामा जी की टिप्पड़ी का प्रतिवाद अत्यंत लापरवाही से किया गया को झूठ से छिपाने का प्रयास किया गया के हित में यही है की हमारे नेता सर्वत्र व्याप्त भ्रष्टाचार को नियंत्रित करें और देश की उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास करें केवल स्वार्थ त्याग से संभव बयानबाजी से समस्या बढ़ रही है,हल नहीं निकल
By Gyan (16th-July-2012 11:31:PM)
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