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यौन उत्पीड़न मामलों में SC ने सरकार से मांगा जवाब
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:04-01-13 03:06 PM
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यौन उत्पीड़न से सम्बंधित सभी मामलों की सुनवाई में तेजी लाने और पीड़ित पक्ष को मुआवजा देने की मांग को लेकर दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।

न्यायालय ने अतिरिक्त अदालतें गठित करने, न्यायिक बुनियादी ढांचा बेहतर बनाने तथा मौजूदा रिक्तियों को भरने से सम्बंधित याचिका पर भी नोटिस जारी किए।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन तथा न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की पीठ ने हालांकि उस याचिका को खारिज कर दी, जिसमें आपराधिक मामलों का सामना कर रहे संसदीय प्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी।

न्यायालय ने कहा कि वह ऐसी याचिका पर आदेश नहीं दे सकता और इसलिए वह लोगों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से सम्बंधित आवेदनों पर ही नोटिस जारी कर रहा है।

न्यायालय ने केंद्र सरकार से सभी नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर मांगा है। न्यायालय ने दिल्ली में चलती बस में छह लोगों द्वारा एक युवती से दुष्कर्म के बाद दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये नोटिस जारी किए।

याचिकाकर्ताओं में से एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रमिला शंकर हैं।

 

 
 
 
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