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अजित पवार बने उपमुख्यमंत्री, शिवसेना ने जताया विरोध
मुम्बई, एजेंसी First Published:07-12-2012 11:44:56 AMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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सिंचाई परियोजना में सरकार के श्वेत पत्र में क्लीन चिट दिए जाने के एक सप्ताह बाद राकांपा के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राकांपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने यहां राजभवन में शपथ ग्रहण की।
  
राज्यपाल क़े शंकरनारायणन ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की मौजूदगी में पवार को पद की शपथ दिलाई। इसकी आलोचना करने वाली विपक्षी पार्टियां शिवसेना-भाजपा शपथग्रहण समारोह से दूर रहीं।
  
पवार ने सिचांई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर 25 सितंबर को नाटकीय रूप से इस्तीफा देने की घोषणा कर कांग्रेस-राकांपा सरकार को संकट में डाल दिया था, क्योंकि पार्टी के अन्य सभी 19 मंत्री इस्तीफा देने की पेशकश करने लगे थे।
  
पवार (53) ने मीडिया में आई इन खबरों के बाद इस्तीफा दे दिया था कि उन्होंने 1999 से 2009 के बीच सिंचाई मंत्री रहते हुए 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ठेके मनमाने ढंग से दिए। सिंचाई विभाग ने 29 नवंबर को राज्य मंत्रिमंडल को सौंपे गए अपने श्वेत पत्र में दावा किया था कि महाराष्ट्र में पिछले 10 सालों में सिंचाई क्षमता में 28 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
  
इसे सिंचाई पर स्थिति पत्र करार दिया गया, न कि जांच रिपोर्ट। राज्य की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह कहे जाने के बाद चव्हाण ने श्वेत पत्र लाने की घोषणा की थी कि 2001 से 2010 के बीच सिंचाई क्षमता में केवल 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस अवधि के दौरान सिंचाई विभाग राकांपा के पास था।
  
श्वेत पत्र में अजित पवार को क्लीन चिट दिए जाने के बाद उनके पुन: उपमुख्यमंत्री के रूप में लौटने की संभावना व्यक्त की जाने लगी थी। अजित पवार के इस्तीफे के बाद कांग्रेस-राकांपा गठबंधन के लिए संकट खड़ा हो गया था और चीजों को नियंत्रण में करने के लिए शरद पवार को मुम्बई आना पड़ा था। राकांपा प्रमुख ने स्पष्ट कर दिया था कि उपमुख्यमंत्री पार्टी के विधायक दल के नेता बने रहेंगे।
  
राकांपा प्रमुख के दाहिने हाथ और मंत्रिमंडल सहकर्मी प्रफुल्ल पटेल ने कहा था कि उपमुख्यमंत्री पद खाली रखा जाएगा। उन्होंने संकेत दिया था कि श्वेत पत्र में क्लीन चिट मिलने पर अजित की वापसी होगी।
  
इस बीच, विपक्षी भाजपा और शिवसेना ने अजित को दोबारा उपमुख्यमंत्री बनाए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और मांग की कि उनके खिलाफ विशेष जांच टीम (एसआईटी) से जांच कराई जानी चाहिए।
  
भाजपा नेता एकनाथ खडसे ने कहा था कि यदि अजित पवार में साहस है तो उन्हें एसआईटी जांच के लिए तैयार रहना चाहिए। यदि वह निर्दोष साबित होते हैं तो उन्हें सम्मान के साथ मंत्रिमंडल में आना चाहिए।
  
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अजित पवार को राकांपा के दबाव में वापस ला रहे हैं। खडसे ने कहा कि यह सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वयं को साफ सुथरी छवि का बताने वाले चव्हाण अजित को राकांपा के दबाव में पुन:मंत्रिमंडल में शामिल कर रहे हैं।

 
 
 
 
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