शुक्रवार, 21 नवम्बर, 2014 | 09:48 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
सुषमा बोलीं, एफडीआई विनाश का गड्ढा
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:04-12-12 05:25 PMLast Updated:04-12-12 06:05 PM
Image Loading

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने मंगलवार को मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को  विकास की सीढ़ी नहीं बल्कि विनाश का गड्ढा बताया।

सुषमा ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ सहित दुनिया के कई देशों में इसके खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं और वहां की सरकारों ने छोटे कारोबारियों के हितों की सुरक्षा के लिए कदम उठाये हैं, लेकिन संप्रग सरकार एकदम उलट फैसला करने पर आमादा है। साथ ही सवाल किया कि कहीं एफडीआई का फैसला भ्रष्टाचार की उपज तो नहीं है।

निचले सदन में मत विभाजन के प्रावधान वाले नियम-184 के तहत एफडीआई मुद्दे पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सुषमा ने कहा कि पूरी दुनिया का अनुभव है कि जहां जहां पर भी मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई आया, खुदरा बाजार समाप्त हो गया। अमेरिका में स्मॉल बिजनेस सैटरडे होता है और लोग हर हफ्ते शनिवार को छोटे दुकानदारों से खरीददारी करने जाते हैं। खुद राष्ट्रपति बराक ओबामा इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एफडीआई पर बहस नयी नहीं है। राजग सरकार के समय में कभी कांग्रेस ने खुद इसका विरोध किया था। उन्होंने सदन में मौजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सवाल किया कि अब सोच क्यों बदल गयी और क्या बात है।

सुषमा ने कहा कि यूरोपीय संघ की संसद ने इस संबंध में एक घोषणापत्र पारित किया है। भारत ही नहीं पूरी दुनिया में जहां कहीं भी कंपनियों ने कम दाम दिये, आंदोलन हुए। सुपर बाजारों के खिलाफ दुनिया के कई देशों में किसानों के आंदोलन
हुए।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी मीडिया की खबरों में आया कि वॉलमार्ट ने खुदरा बाजार में प्रवेश करने के लिए कुछ देशों में कथित रिश्वत दी है। उन्होंने सवाल किया कि कहीं ये निर्णय भ्रष्टाचार में से तो नहीं निकला है।

सुषमा ने कहा कि सरकार का दावा है कि एफडीआई के बाद 30 प्रतिशत उत्पाद छोटे और मंझोले उद्योगों से लेना होगा, लेकिन सबसे ज्यादा बेरोजगारी उत्पादन में आएगी क्योंकि जो छोटे उद्योग अभी शत प्रतिशत बेच रहे हैं, 30 प्रतिशत बेचने के बाद बाकी 70 प्रतिशत कहां ले जाएंगे। यानी सुपर स्टोर बाकी 70 प्रतिशत माल विदेश से आयात करेंगे और सबसे ज्यादा 90 प्रतिशत माल चीन से आएगा। चीन में कारखाने खुलेंगे, उसकी आमदनी बढे़गी और वहां रोजगार के अवसर पैदा होंगे, लेकिन भारत में विनिर्माण क्षेत्र खत्म हो जाएगा और 12 करोड़ घरों में अंधेरा हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का यह भी दावा है कि इससे लोगों को सस्ती और अच्छी चीजें मिलेंगी, लेकिन अगर बाजार प्रतियोगी होगा तभी उपभोक्ता के हित में होगा। एकाधिकार वाला बाजार उपभोक्ता के हित में नहीं होता। बाजार जितना व्यापक होगा, उतना ही उपभोक्ता के लिए अच्छा है, सिमटे हुए बाजार से उसे कोई फायदा नहीं होता।

उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि एफडीआई किसानों के हित में है। किसान की फसल महंगी दर पर बिकेगी और उसे उसका पूरा दाम मिलेगा, लेकिन सुपर बजार चलाने वाली कंपनियां किसानों से सस्ते में उत्पाद खरीदती हैं। कर्मचारियों को कम वेतन देती हैं। अपने मुनाफे के साथ कोई समझौता नहीं करतीं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार तर्क देती है कि मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई आने से बिचौलिया खत्म हो जाएगा। हमारे देश में एक क्षेत्र ऐसा है, जहां बिचौलिया नहीं है। गन्ना किसान अपना उत्पाद सीधे चीनी मिलों को बेच देते हैं। कोई बिचौलिया नहीं होता, लेकिन कितनी बार ऐसा हुआ कि अनुबंध के बाद भी चीनी मिल मालिक गन्ना लेने से मना कर देते हैं और भुगतान के लिए किसान मारा-मारा फिरता है।

 
 
 
टिप्पणियाँ