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मीडियाकर्मियों से सरकार ने मांगी माफी
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:26-12-2012 05:25:43 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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गैंगरेप की शिकार छात्रा को न्याय दिलाने की मांग पर इंडिया गेट पर हुए प्रदर्शन को कवर कर रहे मीडियाकर्मियों पर पुलिस द्वारा पानी की तेज बौछारें करने और लाठीचार्ज करने की घटना पर सरकार ने बुधवार को माफी मांगी।

वित्त मंत्री पी चिदंबरम और सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने इस घटना के लिए माफी मांगी है। कैबिनेट की बैठक का ब्यौरा देते समय जब संवाददाताओं ने पत्रकारों पर लाठीचार्ज, उन पर पानी की बौछारें करने, बदसलूकी करने तथा पुलिसकर्मियों के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में घुसकर पिटाई करने की ओर ध्यान दिलाया गया तो चिदंबरम ने कहा कि ऐसा लगता है कि पानी की बौछारें छोडी गयीं। लाठीचार्ज भी किया गया और संभव है कि कुछ मीडियाकर्मी घायल हो गये हों।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के पुलिस आयुक्त इस घटना के लिए माफी मांग चुके हैं। चिदंबरम ने मीडियाकर्मियों पर इस तरह की कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस की निन्दा करते हुए कहा कि वह इसके लिए (सरकार की ओर से) माफी चाहते हैं। चिदंबरम ने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे बीत गयी बात को भूलकर आगे बढें। सरकार इस बारे में आवश्यक निर्देश दे रही है कि ऐसे हालात में पत्रकारों की पहचान की जाए और अधिक से अधिक संयम बरता जाए।

यह पूछे जाने पर कि मीडियाकर्मियों पर पुलिस कार्रवाई के लिए सरकार की ओर से किसने निर्देश दिया था, तिवारी ने कहा कि जो भी हुआ गलत था। मैं कड़े शब्दों में निन्दा करता हूं। इतने साल से हम और आप वार्तालाप कर रहे हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि हमारी ओर से ऐसा कोई आदेश दिया जाएगा कि आप लोगों पर अत्याचार किया जाए। अब फैसला मैं आपके विवेक पर छोड़ता हूं।

उल्लेखनीय है कि रविवार 23 दिसंबर को इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारी भीड़ की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कैमरे तोड़े और उन पर पानी की बौछारें कीं। कुछ पुलिसकर्मी कैमरामैन और पत्रकारों को खदेड़ते हुए प्रेस क्लब ऑफ इंडिया तक आ गये और जब इन लोगों ने क्लब के भीतर घुसकर शरण लेनी चाही तो पुलिसकर्मियों का गुस्सा क्लब के स्टॉफ पर फूट पड़ा और दो लोगों को कथित रूप से लाठियों से पीटा गया।

सरकार की ओर से इस घटना पर माफी मांगे जाने पर प्रेस क्लब के महासचिव अनिल आनंद ने बताया कि सरकार ने माफी मांगी है, इसका स्वागत है, लेकिन उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में मीडियाकर्मियों के साथ ऐसा न होने पाये।

आनंद ने चिदंबरम की इस दलील को मानने से इंकार कर दिया कि घटना वाले दिन पुलिसकर्मियों के लिए संभवत: यह पहचानना मुश्किल था कि कौन पत्रकार है और कौन नहीं। आनंद ने कहा कि पुलिस वालों को हाथ में माइक लिये पत्रकारों और कैमरा लिये फोटोग्राफरों को पहचानने में क्या दिक्कत थी। पत्रकारों पर पुलिस कार्रवाई की कई मीडिया संगठनों और पत्रकार यूनियनों ने कड़ी निन्दा की है।

 

 
 
 
 
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