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नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान/एजेंसी First Published:07-12-2012 01:45:11 PMLast Updated:07-12-2012 04:05:46 PM

मल्टीब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लाने के खिलाफ राज्यसभा में पेश विपक्ष का प्रस्ताव शुक्रवार को गिर गया। प्रस्ताव पर मत विभाजन से पहले ही सरकार को राहत देते हुए सपा सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए।

इससे पहले सरकार पर देश के हितों की कीमत पर विदेशी कंपनियों के हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए राज्यसभा में शुक्रवार को विपक्षी सदस्यों ने बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पुरजोर विरोध किया और कहा कि आर्थिक सुधार उन क्षेत्रों में किए जाने चाहिए जहां उनकी सचमुच जरूरत है।

दूसरी ओर सरकार के घटक दलों ने एफडीआई को किसानों, व्यापारियों और देश के हित में बताते हुए कहा कि यह समय की मांग है।
   
बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर राज्यसभा में मतदान के प्रावधान वाले नियम के तहत हुई चर्चा में विपक्षी राजग और संप्रग सरकार की पूर्व घटक तणमूल कांग्रेस ने एफडीआई का विरोध करते हुए सरकार पर पूंजीवाद के समक्ष समर्पण करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों पर कुठाराघात होगा।
   
इससे पहले सभापति हामिद अंसारी ने दुर्लभ से दुर्लभतम मामले के तहत प्रश्नकाल स्थगित करने का ऐलान करते हुए कहा कि ज्यादातर सदस्यों की राय है कि एफडीआई पर चर्चा के लिए ऐसा किया जाना चाहिए।
   
उन्होंने कहा कि कल से शुरू हुई इस चर्चा में 23 सदस्यों ने अपनी बात रखी है और 11 सदस्यों को अभी अपने विचार पेश करने हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं और संसदीय मामलों के मंत्री कमलनाथ ने उनसे प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा जारी रखने को कहा है। मैंने दुर्लभ से दुर्लभतम मामले के तहत उनका आग्रह स्वीकार कर लिया है।
   
पूर्व में उच्च सदन की बैठक शुरू होते ही राकांपा के डी पी त्रिपाठी ने कहा कि 20 साल पहले बाबरी मस्जिद गिराई गई थी और इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए। अंसारी ने उन्हें यह मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी। भाजपा सदस्यों ने भी इसका विरोध किया।
   
अन्नाद्रमुक के वी मैत्रेयन द्वारा बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के विरोध में कल सदन में पेश प्रस्ताव पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए जदयू के शिवानंद तिवारी ने कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हमारे देश की आर्थिक नीतियां कौन लोग बना रहे हैं।
   
उन्होंने कहा वर्तमान मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से जुड़े रहे हैं। उनके पूर्ववर्ती कौशिक बसु पद छोड़ने के तत्काल बाद विश्व बैंक से जुड़ गए। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से जुड़े रहे हैं और खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए हैं।
   
तिवारी ने कहा अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक, डब्ल्यूटीओ, एशियन विकास बैंक पूरी दुनिया की आर्थिक नीतियां निर्देशित कर रहे हैं। इन नीतियों को अपनाने से देश के भविष्य पर और खुद आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
   
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति महात्मा गांधी ने स्वदेशी का मूल मंत्र दिया था लेकिन आज इस देश को कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड के लोग चला रहे हैं।
   
तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर राय ने कहा कि एफडीआई वास्तव में प्रत्यक्ष विदेशी हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने पांच सितंबर को मेरे प्रश्न के जवाब में कहा था कि व्यापक आम सहमति बनने तक बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति पर फैसला टाल दिया गया है। लेकिन अचानक 15 सितंबर को यह फैसला कर दिया गया।
   
तृणमूल कांग्रेस के नेता ने कहा आखिर दस दिन में ऐसा क्या हो गया, दस दिन में आम सहमति कैसे बन गई, सच यह है कि आनंद शर्मा ने देश को और सदन को गुमराह किया है।
   
विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए सुखेन्दु शेखर राय ने कहा कि कोई भी विदेशी कंपनी किसानों को उंची कीमत क्यों देगा, किसानों को वही मिलेगा, जो आज मिल रहा है।
   
उन्होंने कहा कि 400 साल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने गुजरात के सूरत से अपना कारोबार शुरू किया और धीरे धीरे पूरे देश पर कब्जा जमा लिया। इसी तरह एफडीआई भले ही 53 देशों से शुरू होगा लेकिन धीरे धीरे पूरे देश में फैलेगा और कारोबारी खत्म हो जाएंगे।
   
सरकार पर उन्होंने आरोप लगाया यह पूरी तरह पूंजीवाद के समक्ष समर्पण कर चुकी है और एफडीआई पर चर्चा के दौरान संसद के दोनों सदन में ज्यादातर दलों ने इसका विरोध किया लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है क्योंकि वह व्हाइट हाउस से निर्देशित हो रही है।
   
भाजपा के शांता कुमार ने कहा कि विदेशी निवेश की अवहेलना नहीं की जा सकती क्योंकि बहुराष्ट्रीय कारोबार आज जरूरी है। लेकिन एफडीआई की अनुमति कैसे और कहां दी जाए, यह देश के हितों को ध्यान में रखते हुए तय करना चाहिए।
   
उन्होंने कहा रेलवे जैसे क्षेत्र में देश को विदेशी निवेश की जरूरत है ताकि लेह लद्दाख जैसे दूरस्थ इलाके जोड़े जा सकें। नागरिक उड्डयन, बिजली और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एफडीआई जरूरी है लेकिन इस दिशा में सरकार कोई उत्साह नहीं दिखा रही है।

शांताकुमार ने कहा जिस क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए उत्साह दिखाया जा रहा है वहां ऐसे निवेश की जरूरत ही नहीं है। औषध क्षेत्र में एफडीआई की वजह से आज दवाएं महंगी हो गइ और रैनबैक्सी जैसी भारतीय कंपनियां बिक चुकी हैं।
   
भाकपा के डी राजा ने कहा कि उनकी पार्टी बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के सरकार के फैसले को खारिज करती है और सदन की भावना भी सरकार के फैसले के खिलाफ है।
   
राजा ने कहा कि खुदरा क्षेत्र में एफडीआई का सरकार का फैसला जाहिर करता है कि वह स्वदेशी संसाधनों को गतिशील करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार सजन और किसानों तथा उपभोक्ताओं को लाभ होने का मिथक गढ़ रही है लेकिन असली तस्वीर इससे बिल्कुल उलट है। उन्होंने कहा कि नवउदारवादी आर्थिक नीतियां देश हित में नहीं हैं।
   
उन्होंने कहा बहुराष्ट्रीय कंपनियां आम आदमी को नहीं पहचानतीं, बल्कि वह अपना मुनाफा देखती हैं। इससे न रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और न ही किसानों को या देश को कोई लाभ होगा।
   
राजा ने कहा प्रधानमंत्री कहते हैं कि पैसे पेड़ पर नहीं लगते। मैं जानना चाहता हूं कि क्या यही बात सोच कर सरकार एफडीआई की ओर बढ़ी
   
शिरोमणि अकाली दल के बलविंदर सिंह भुंडर ने कहा कि एफडीआई परमार्थ कार्य करने वाला ट्रस्ट नहीं है और यह किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। उन्होंने कहा एफडीआई देश को बचाएगा नहीं बल्कि उसे गिरवी रख देगा। इससे न किसानों को और न ही खुदरा कारोबारियों को कोई फायदा होगा।
   
भुंडर ने कहा कि अगर किसानों को बचाना है तो बीज, उर्वरक, डीजल, बिजली आदि को सस्ता करना होगा।
   
असम गण परिषद के कुमार दीपक दास ने एफडीआई पर अपनी पार्टी की ओर से आपत्ति जताते हुए कहा हम आर्थिक सुधारों के खिलाफ नहीं हैं क्योंकि हम जानते हैं कि देश को सुधारों की जरूरत है। लेकिन ये सुधार आम आदमी, किसानों, छोटे और गरीब व्यापारियों तथा बेरोजगार युवकों की कीमत पर बिल्कुल नहीं होने चाहिए।
   
प्रस्ताव का विरोध करते हुए बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के बिस्वजीत दयमारी ने कहा कि बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि कई देशों में इसकी अनुमति पहले ही दी जा चुकी है।
   
दूरसंचार क्षेत्र का उदाहरण देते हुए दयमारी ने कहा कि इसमें जब विदेशी कंपनियां आइ तो कई तरह की आशंकाएं जताई गइ लेकिन नतीजे खराब नहीं रहे।
   
इनेलोद के रणबीर सिंह प्रजापति ने कहा कि बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से कारोबारी प्रभावित होंगे और उनके लिए अपना कारोबार बंद करने की नौबत आ जाएगी। उन्होंने कहा सरकार दावा करती है कि बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बिचौलियों को खत्म कर देगा। यह सही नहीं है क्योंकि खुद बड़े खुदरा कारोबारी बिचौलियों की भूमिका में आ जाएंगे।
   
लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के सरकार के फैसले का जोरदार समर्थन किया और कहा कि इससे कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे गरीब लोगों को मदद मिलेगी।
   
पासवान ने कहा मैं एफडीआई का समर्थन इसलिए कर रहा हूं क्योंकि इससे गरीब किसानों को मदद मिलेगी। किसानों का उत्पाद मंडी तक आते आते भले ही महंगा हो जाता है पर किसान को उसका समुचित दाम नहीं मिलता। हो सकता है कि एफडीआई से उसे उसके उत्पाद का सही दाम मिले।
   
उन्होंने कहा कि एफडीआई के विरोध का विपक्ष का रवैया गुड़ खाएं गुलगुले से परहेज करें वाला है। लेकिन उसे देखना चाहिए कि एफडीआई से मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
  
निर्दलीय अमर सिंह ने कहा बात बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की हो या अन्य किसी मुद्दे की, अगर वह देश के हित में है तो उसका समर्थन करना चाहिए।
   
उन्होंने कहा पिछले विधानसभा चुनाव में मैं सपा में था और तब पार्टी ने अपने घोषणापत्र में कंप्यूटर का विरोध किया था। लेकिन पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में सपा ने कंप्यूटर का समर्थन किया। जरूरी नहीं है कि एक बार गलती की तो उसे आगे भी दोहराया जाए।   
   
कांग्रेस की प्रभा ठाकुर ने एफडीआई का समर्थन करते हुए कहा कि इससे किसानों सहित समाज के विभिन्न वगो को फायदा होगा। उन्होंने कहा हर नयी शुरूआत का शुरू में विरोध होता है। रेल, पनबिजली जैसे उदाहरण हमारे सामने हैं।
  
उन्होंने कहा कि सरकार जनता की भलाई के लिए एफडीआई ला रही है। इससे महिलाओं को विशेष फायदा होगा।

 
 
 
 
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