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एफडीआई पर निर्णय से पहले विभिन्न पक्षों से किया था व्यापक विचार विमर्श: शर्मा
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:07-12-12 02:43 PM
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सरकार ने बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी देने के निर्णय से पहले आम सहमति बनाने का प्रयास नहीं करने के विपक्ष के आरोपों को आज सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अधिकतर दलों के नेताओं और मुख्यमंत्रियों से इस संबंध में बातचीत की गई थी और 11 राज्यों ने इस क्षेत्र में एफडीआई की नीति का समर्थन किया है।
   
राज्यसभा में बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के खिलाफ लाए गए विपक्ष के प्रस्ताव पर हुई चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि यह कहना सरासर गलत है कि केंद्र ने एफडीआई फैसल से पहले राजनीतिक दलों और विभिन्न राज्य सरकारों से बातचीत नहीं की। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, तणमूल प्रमुख ममता बनर्जी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की गई।
   
शर्मा ने कहा कि सरकार ने भाजपा के अध्यक्ष नितिन गडकरी तथा वाम दलों के नेताओं से भी बातचीत की थी। भाकपा नेता डी राजा, माकपा नेता सीताराम येचुरी और ममता ने उसी समय स्पष्ट कर दिया था कि उनके दल इस निर्णय का समर्थन नहीं कर सकते। लेकिन भाजपा के नेता अब कह रहे हैं कि उनसे बात नहीं की गई। यदि भाजपा के अध्यक्ष अपनी पार्टी के सदस्यों को इस बारे में जानकारी नहीं देते हैं तो ऐसे में  सरकार कुछ नहीं कर सकती।
   
शर्मा ने कहा कि विपक्ष दावा कर रहा है कि इस निर्णय से किसानों पर विपरीत असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह फैसला करने से पहले कषि क्षेत्र के विभिन्न संगठनों से भी बातचीत की थी। इनमें भारतीय किसान यूनियन, भारतीय कषक समाज, शेतकारी संगठन जैसे कषि संगठन शामिल हैं।
   
उन्होंने कहा कि इन कृषि संगठनों ने एफडीआई के बारे में सरकार को लिख कर अपनी सहमति दी है।
   
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि केंद्र ने राज्यों के मुख्य सचिवों को इस बारे में लिखा था और 21 राज्यों ने अपनी प्रतिक्रिया भेजी है। उन्होंने कहा कि 11 राज्यों ने सरकार से कहा है कि वह अपने यहां बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सीमावर्ती राज्य और राजस्थान जैसे बड़े कृषि प्रदेश भी शामिल हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि केवल छोटे छोटे राज्य ही इस फैसले के समर्थन में सामने आए हैं।
   
उन्होंने इस मामले में विपक्ष पर अनावश्यक भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने यह नहीं कहा है कि एफडीआई निवेश करने वालों को 30 प्रतिशत से अधिक की खरीद स्थानीय स्तर पर नहीं करनी है। उन्होंने कहा कि 30 प्रतिशत की सीमा न्यूनतम है, अधिकतम नहीं।
   
शर्मा ने कहा कि भारत पहला ऐसा देश है जिसने इस मामले में न्यूनतम सीमा तय की है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा देश में आने वाले निवेश का 50 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में लगाया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

 
 
 
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