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Image Loading अन्य फोटो खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर विपक्ष अपने प्रस्ताव के समर्थन में 109 वोट ही जुटा सका, जबकि सरकार 123 सदस्यों का समर्थन हासिल करने में कामयाब हो गई।
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सपा, बसपा की मदद से एफडीआई पर सरकार की जीत
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:07-12-12 04:09 PM
Last Updated:08-12-12 10:33 AM
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लोकसभा के बाद आज राज्यसभा ने भी बहुमत के समर्थन के साथ किराना बाजार में 51 प्रतिशत सीधे विदेशी पूंजी लगाने के निर्णय पर अपनी मुहर लगा दी और इसके खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव 14 मतों के अंतर से गिर गया।
 
बहुजन समाज पार्टी के समर्थन और समाजवादी पार्टी के वाकआउट के बल पर सरकार ने संख्या बल का पलडा अपने पक्ष में झुका लिया और विपक्ष अपने प्रस्ताव के समर्थन में 109 वोट ही जुटा सका, जबकि सरकार 123 सदस्यों का समर्थन हासिल करने में कामयाब हो गई।
 
एफडीआई के खिलाफ सदन में दो दिन तक चली चर्चा का जवाब देते हुए इसके प्रस्तावक अन्ना द्रमुक के वी मैत्रीयन ने घोषणा की कि आज भले ही सरकार एफडीआई के पक्ष में जीत हासिल करने में सफल हो जाए, लेकिन देश की जनता इसके खिलाफ वोट देगी और अगले चुनाव के बाद आने वाली सरकार इस फैसले को उलट देगी।
 
उन्होंने कहा कि पूरे देश में एफडीआई के खिलाफ भावना है और अगर संख्या में सरकार जीतती है तो यह संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ के संख्या प्रबंधन की जीत ही होगी, जबकि जनभावनाओं के हिसाब से वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा हार रहे हैं। उन्होंने कहा कि एफडीआई पर सरकार के साथ वोट देने वाले दलों की संख्या भले ही ज्यादा हो लेकिन इसके खिलाफ बोलने वाले दलों और सदस्यों की संख्या तथा देश के बहुसंख्यक राज्य इसके विरोध में हैं।
 
मैत्रीयन ने गिनाया कि चर्चा में 32 लोगों ने भाग लिया और इनमें से 22 सदस्यों ने एफडीआई के विरोध में आवाज उठाई। उन्होंने राज्यों के नाम भी गिनाए जो इस निर्णय को लागू नहीं करेंगे।
 
चर्चा समाप्त होने के बाद सभापति हामिद अंसारी ने प्रस्ताव को पहले ध्वनिमत के लिए रखा और फिर मतविभाजन की व्यवस्था वाले नियम के तहत इस पर मतविभाजन भी कराया गया।

इलैक्ट्रानिक मतदान में भ्रम होने के कारण दो बार वोटिंग हुई। बाद में पर्ची से भी वोट डाले गए। सभापति ने घोषणा की कि विपक्ष के प्रस्ताव के पक्ष में 109 और उसके खिलाफ 123 वोट पडे हैं।

एफडीआई के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आज दूसरे दिन भी तीखी नोकझोक और शोरशराबा हुआ और एक समय तो सदन की कार्यवाही स्थगित करने भी नौबत आई सदन की बैठक एक घंटे के लिए स्थगित करनी पडी।

वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा जब चर्चा में हस्तक्षेप कर रहे थे तो उन्होंने योजना आयोग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए जनता दल यू के सदस्य एन के सिंह का नाम लिया। सिंह भी इसके जवाब में अपनी बात रखना चाहते थे। लेकिन जब शर्मा उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हुए तो भारी शोरगुल हो गया।
 
इससे पहले शर्मा के हस्तक्षेप के दौरान ही उस समय शोर हुआ जब वह फलों सब्जियों के सडने के बारे में आंकडे पेश कर रहे थे। विपक्ष के नेता का आरोप था कि वाणिज्य मंत्री अपनी ही सरकार के आंकडों की अनदेखी कर रहे हैं।
 
वाणिज्य मंत्री के बोलने के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के नेता प्रो. रामगोपाल यादव खडे हो गए और उन्होंने सरकार के जवाब पर असंतोष जाहिर करने के बाद अपनी पार्टी के सदस्यों के साथ सदन से वाकआउट किया।

 
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