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एफडीआई पर चर्चा कराने को सरकार तैयार!
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:28-11-12 04:51 PM
Last Updated:28-11-12 06:00 PM
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मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन से बने गतिरोध को समाप्त करने के प्रयास में सरकार ने बुधवार को संकेत दिया कि वह दोनों सदनों में मत विभाजन वाले नियमों के तहत इस विषय पर चर्चा कराने को तैयार है।

भाजपा के मत विभाजन वाले नियमों के अंतर्गत ही चर्चा कराए जाने पर अड़े रहने पर संसदीय मामलों के मंत्री कमलनाथ आज लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से मिले।

इन दोनों से बातचीत के बाद कमलनाथ ने कहा कि संसद को चलाने के हित को देखते हुए पीठासीन अधिकारी कोई भी फैसला (किसी भी नियम के तहत चर्चा कराने का) कर सकते हैं। सुषमा और जेटली से मिलने से पहले वह लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी से भी मिले।

विपक्ष के नेताओं ने उनसे मिलने आए कमलनाथ से स्पष्ट कर दिया कि वे केवल उसी नियम के तहत चर्चा कराने पर राजी होंगे जिसमें बहस के बाद मत विभाजन का प्रावधान होगा। दोनों ने संसदीय कार्य मंत्री से यह शिकायत भी की कि एफडीआई मामले में कोई निर्णय करने से पहले सभी राजनीतिक दलों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित संबंधित हितधारकों से विचार विमर्श करने के संसद के दोनों सदनों में दिए गए अपने आश्वासन का सरकार ने सीधा उल्लंघन किया है।

कमलनाथ से लगभग एक घंटे की मुलाकात के बाद सुषमा ने कहा कि ऐसी स्थिति में बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के सरकार के एकतरफा निर्णय के बारे में सदन की भावना जानने का एकमात्र रास्ता यही बचता था कि इस मुद्दे पर चर्चा के बाद सदन में मत विभाजन भी कराया जाए।

कमलनाथ ने बहुमत का विश्वास जताते हुए कहा कि सरकार के लिए संख्या चिंता की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि सदस्य इतने परिपक्व हैं कि वे एफडीआई के पक्ष में निर्णय करेंगे। उन्होंने विपक्ष के इस आरोप से इंकार किया कि संख्या बल जुटाने के प्रयास में सरकार ने शीतकालीन सत्र के पहले चार दिन बर्बाद किए।

यह कहे जाने पर कि प्रमुख सहयोगी दल द्रमुक को एफडीआई मुद्दे पर मनाने के बाद ही सरकार मत विभाजन वाले नियम के तहत चर्चा के लिए तैयार हुई, संसदीय कार्य मंत्री ने दावा किया पहले दिन से मैं कहता आ रहा हूं कि हमारे पास संख्या है।

उधर, सुषमा ने संसद में चर्चा के बाद वोटिंग की मांग पर मुख्य विपक्षी दल के अड़े रहने को सही बताते हुए कहा कि इससे सरकार गिर नहीं जाएगी। केवल एफडीआई का निर्णय गिरेगा। अगर संसद का बहुमत इस निर्णय के विरुद्ध है तो सरकार को उसका आदर करना चाहिए।

कमलनाथ ने तर्क दिया कि सोमवार को हुई सर्वदलीय बैठक में अधिकतर बिना वोटिंग के प्रावधान वाले नियम के तहत चर्चा कराने के पक्ष में थे। उस बैठक में यह बात भी सामने आई कि अधिकांश दल चाहते हैं कि संसद चले।

उन्होंने कहा कि सरकार मत विभाजन वाले नियम 184 के तहत चर्चा को अपनी ओर से स्वीकार नहीं कर सकती है। हमने यह निर्णय पीठासीन अधिकारियों पर छोड़ दिया है। सदन को चलाने के लिए वे जो निर्णय लेना चाहते हैं, उन्हें लेने दीजिए।

इस सवाल पर कि विपक्ष के वोटिंग कराने पर अड़े रहने को देखते हुए क्या सरकार इसके लिए तैयार हुई है, उन्होंने कहा कि हम इसके खिलाफ नहीं हैं।

 

 
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