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वायदा निभाने में विफल रही शीला सरकार
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:23-12-12 03:08 PM
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राजधानी में 23 वर्षीय एक लड़की के साथ चलती बस में गैंगरेप की घटना ने महिलाओं एवं बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था मुहैया कराने के शीला दीक्षित सरकार के वायदे को खोखला साबित कर दिया। मुख्यमंत्री ने हालांकि, हादसे की जिम्मेदारी केंद्र पर डालने की कोशिश की है।

दिल्ली सरकार ने परिवहन व्यवस्था के नियमन के लिए पिछले तीन साल में तिपहियों, टैक्सियों और डीटीसी की बसों में आवश्यक रूप से जीपीएस लगाने जैसे कई कदम उठाने की घोषणा की थी। स्कूल बसों के लिए कड़े नियम बनाने तथा सभी बस स्टॉप पर इलेक्ट्रॉनिक सूचना बोर्ड लगाने जैसे कदमों की भी घोषणा की गई थी, लेकिन इनमें से कोई भी योजना अब तक कार्यान्वित नहीं हुई है।

दिल्ली परिवहन विभाग ने एक हजार से अधिक बस स्टॉप पर इलेक्ट्रॉनिक सूचना बोर्ड लगाने का फैसला किया था, ताकि बसों के पहुंचने का समय पता लग सके, लेकिन इस फैसले का असर एक दिन के लिए भी नहीं दिखा। वर्ष 2010 में टैक्सी और ऑटो के किराए में 35 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करते हुए सरकार ने ऑटो चालकों के लिए अपने वाहनों में जीपीएस लगवाना अनिवार्य कर दिया था, ताकि उनके आवागमन पर नजर रखी जा सके, लेकिन आज की तारीख में करीब 55 हजार तिपहिया शहर में बिना जीपीएस के चल रहे हैं।

बढ़ते हादसों को लेकर जनाक्रोश के बाद दिल्ली सरकार ने दिसंबर 2010 से करीब तीन हजार ब्लूलाइन बसों का चालान किया, लेकिन कुछ बस संचालक अपनी बसों को सफेद रंग से रंगकर शहर में अवैध रूप से दौड़ा रहे हैं। शीला ने लड़की के साथ गैंगरेप की घटना के बारे में बात करते समय कहा था कि उनके हाथ बंधे हुए हैं और शहर में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस आयुक्त तथा उपराज्यपाल की है।

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि समूची परिवहन व्यवस्था का संचालन दिल्ली सरकार करती है। घटना चलती बस में हुई थी। हमें अपनी परिवहन व्यवस्था का नियमन करना चाहिए। मुख्यमंत्री जिम्मेदारी से कैसे बच सकती हैं। दिल्ली के परिवहन मंत्री रमाकांत गोस्वामी और परिवहन आयुक्त राजेंद्र कुमार से संपर्क के लिए बार-बार की गई कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकला।

गुप्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री केंद्र पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश कर रही हैं, जबकि परिवहन व्यवस्था में खामियों के लिए उनकी सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि दुखद घटना के लिए पुलिस के साथ दिल्ली सरकार भी जिम्मेदार है। हालांकि, शीला यह दिखाने की पूरी कोशिश कर रही हैं कि दिल्ली सरकार का घटना से कोई लेना-देना नहीं है।

सार्वजनिक परिवहन सेवा को बढ़ाने के प्रयास के तहत सरकार ने पिछले साल महत्वाकांक्षी क्लस्टर बस सेवा शुरू की थी और वायदा किया था कि इसके तहत 2012 तक बेड़े का आकार दो हजार से अधिक होगा, लेकिन अब तक करीब 300 वाहन ही योजना के तहत चल रहे हैं। सरकार ने पिछले साल डीटीसी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन इस संबंध में भी अब तक कुछ नहीं हुआ है।

मौजूदा नियमों के मुताबिक सार्वजनिक परिवहन वाहनों के सभी चालकों के पास परिवहन विभाग द्वारा जारी सार्वजनिक सेवा वाहन (पीएसवी) बैज होना चाहिए, लेकिन अधिकारी स्वीकार करते हैं कि ज्यादातर चालक इसके बिना ही बस, तिपहिया और टैक्सी चला रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने 2010 में स्मार्ट कार्ड आधारित पीएसवी जारी करने का फैसला किया था, लेकिन परियोजना को प्रभावी तरीके से कार्यान्वित नहीं किया गया। पीएसवी स्मार्ट कार्ड पर लगी चिप में पीएसवी धारक के बारे में उसके पते, लाइसेंस नंबर और पुलिस सत्यापन सहित विभिन्न सूचनाएं दर्ज होती हैं।

 
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