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नितिन गडकरी पर जेठमलानी ने फिर साधा निशाना
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:27-11-12 03:47 PM
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भाजपा से खुद को निलंबित किये जाने को पार्टी के अधिकार क्षेत्र से बाहर करार देते हुए राम जेठमलानी ने मंगलवार को नितिन गडकरी पर एक बार फिर निशाना साधा और उन पर मुख्य विपक्षी दल को आत्मघाती रास्ते पर ले जाने का आरोप लगाया।
   
गडकरी को सख्त लहजे में लिखे पत्र में जेठमलानी ने सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति का विरोध किए जाने के लिए अरुण जेटली को भी आड़े हाथों लिया। भाजपा से निलंबित सांसद ने कहा कि आपका निलंबन का आदेश (जेठमलानी को) अधिकार क्षेत्र से बाहर और संसदीय बोर्ड के अधिकार को अपने हाथों में लेने वाला है। और कोई ऐसी स्थिति नहीं आई थी कि आप मुझसे बात किये बिना आगे बढ़े और सामान्य शिष्टाचार का पालन न करें।
   
उन्होंने कहा कि गडकरी की ओर से उनके खिलाफ उठाये गए कदम का उनपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि वह कानूनी पेशे और राजनीति में लोगों के प्यार और सम्मान की वजह से हैं जो संसद की सदस्यता का मोहताज नहीं है।
   
जेठमलानी ने अपने पत्र में कहा कि मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि आप आत्मघाती मार्ग पर बढ़ रहे हैं और आप पूरी पार्टी को इसमें घसीटने पर अमादा हैं। विनाश काले, विपरीत बुद्धि़ पुरानी कहावत है।
   
उन्होंने आरोप लगाया कि गडकरी उनके प्रति पहले से दुर्भावना से प्रेरित हैं और इसलिए उन्हें निलंबित करने का कदम उठाया है। जेठमलानी ने अपने पत्र में सीबीआई के निदेशक के रूप में रंजीत सिन्हा की नियुक्ति पर विवाद के विषय को भी उठाया और इस मामले में राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली की कथित भूमिका का जिक्र किया। 
   
जेठमलानी ने कहा कि रंजीत सिन्हा के प्रतिद्वन्द्वी की ओर से दायर मामला इतना कुख्यात है और उसके बारे में हमारे पार्टी नेताओं को जानकारी ही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रतिद्वन्द्वी अधिकारी की पैरवी करने वाले वकील वस्तुत: जेटली के कनिष्ठ रहे हैं।
   
जेठमलानी ने कहा कि यह असंभव है कि कैट के समक्ष दायर इस वाद के बारे में उन्हें (जेटली) जानकारी नहीं हो और मैं महसूस करता हूं कि आप (गडकरी) जेटली की सलाह पर काम कर रहे हैं।
   
उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया से इस बात की जानकारी मिली कि सीबीआई के निदेशक पद पर नियुक्ति का उनकी पार्टी के नेता विरोध कर रहे हैं।
   
उन्होंने गडकरी से शिकायत की कि हालांकि वे राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्य और भाजपा के संस्थापकों में हैं, लेकिन उनसे लोकपाल के मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने चर्चा नहीं की।

 
 
 
 
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