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चिदंबरम को कोर्ट ने दी राहत, नहीं बनेंगे आरोपी
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:04-02-12 09:34 AM
Last Updated:05-02-12 01:03 AM
गृहमंत्री पी चिदंबरम और संप्रग सरकार को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उन्हें 2जी मामले में सह आरोपी बनाने की जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के साथ लिए गए फैसले में किसी आपराधिक षड्यंत्र में शामिल नहीं थे और उन्होंने कोई आर्थिक लाभ नहीं प्राप्त किया था।
विवादित 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के समय 2008 में वित्त मंत्री रहे चिदंबरम को क्लीन चिट देते हुए विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओपी सैनी ने कहा कि चिदंबरम सिर्फ दो फैसलों - स्पेक्ट्रम की कीमतों को 2001 के स्तर पर रखना और दो कंपनियों द्वारा अंशधारिता में कमी में शामिल थे। अदालत के अनुसार यह अपराध नहीं था।
अदालत का यह फैसला चिदंबरम को निजी राहत देने के अलावा संप्रग सरकार के लिए भी सुकून भरा है। हाल के दिनों में सरकार को 2जी सहित कई मामलों में अदालतों की कई प्रतिकूल टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है।
अदालत ने कहा कि रिकार्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है कि वह दोनों फैसलों में शामिल होने के दौरान किसी आपराधिक साजिश के तहत काम कर रहे थे। न्यायाधीश ने 64 पृष्ठों के अपने आदेश में कहा कि पी चिदंबरम के खिलाफ कार्यवाही के लिए मुझे कोई उचित आधार नहीं दिखता। इस याचिका में कोई आधार नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।
अदालत के इस फैसले का कांग्रेस पार्टी ने स्वागत किया वहीं स्वामी ने असंतोष जताते हुए कहा कि न्यायाधीश ने भूल की है और वह इसे ऊंची अदालतों में चुनौती देंगे। न्यायाधीश ने कहा कि रिकार्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है कि दूरसंचार नीति में हेरफेर के लिए या अपने लिए या किसी दूसरे के लिए आर्थिक लाभ प्राप्त करने की खातिर राजा और चिदंबरम के बीच कोई समझौता था।
स्वामी की शिकायत को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि कुछ यहां और कुछ वहां के सबूत किसी आपराधिक षड्यंत्र के लिए प्रथम दृष्टया सबूत नहीं हो सकते। अदालत ने कहा कि किसी फैसले में किसी भी स्तर पर इससे जुड़े हर व्यक्ति को आरोपी नहीं कहा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम के खिलाफ सुनवाई किए जाने की याचिका पर फैसला गुरूवार को विशेष न्यायाधीश पर छोड़ दिया था। अदालत ने कहा कि दो कंपनियों को अंशधारिता में कमी करने की अनुमति देने और 2001 की दर से स्पेक्ट्रम की कीमत निर्धारित करने में चिदंबरम ने किसी बदनीयती से काम नहीं किया। स्वामी ने ऐसा ही आरोप लगाया था।
अदालत ने कहा कि ये दोनों कार्य अवैध नहीं हैं और पी चिदंबरम की ओर से कोई अन्य गलत कार्य किए जाने का सबूत रिकार्ड में नहीं है। उसने कहा कि स्वामी यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दे सके कि चिदंबरम भ्रष्ट एवं अवैध मकसद से काम कर रहे थे तथा उनके खिलाफ मामला इस संबंध में सुनवाई का सामना कर रहे अन्य आरोपियों से अलग है।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(2)
मैं समझता हूँ की अब स्वामी साहब को अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए परन्तु जब वे किसी के लिए यह काम कर रहे हैं तो शायद वोह ऐसा नहीं करेंगे उनका एक मात्र मकसद भाजपा को सत्तासीन करना है स्वामी जी को फ़िलहाल अभी निराश ही होना
By Mohd. Taufiq (5th-February-2012 07:41:AM)
घोटालो की दलदल और सुप्रीम कोर्ट के फेसले ,अब देश बचाओ ,वर्ना नेता विकास के नाम पर भ्रटाचार की गंगा में हाथ धोते रहेगे ,मनमोहनजी जागो ,
By klshor sanas (4th-February-2012 08:04:PM)
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