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पश्चिम बंगाल सरकार ने नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी के तहत मुस्लिमों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने यह घोषणा सोमवार को यहां की। इसके तहत राज्य में शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मुस्लिमों के लिए आरक्षण मुहैया कराए जाएंगे।
मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने राज्य सचिवालय में संवाददाताओं से कहा कि हमने रंगनाथ मिश्र आयोग की अनुशंसाओं को स्वीकार करने का फैसला किया है और उसके कार्यान्वयन के लिए कदम उठाए जाएंगे। इस क्रम में राज्य सरकार ने केंद्र के फैसले की प्रतीक्षा किए बिना घोषणा की।
उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह यहां भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन मुस्लिमों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। राज्य में ओबीसी के लिए सात प्रतिशत आरक्षण है।
भटटाचार्य ने कहा कि पहचान के बाद, हम उन्हें ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण मुहैया कराएंगे।
इसके पहले आज आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने राज्य के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें मुस्लिम समुदाय के 15 समूहों को शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में चार प्रतिशत आरक्षण मुहैया कराए जाने का प्रावधान था।
अदालत के आदेश के तुरंत बाद मुख्यमंत्री के रोसैया ने राज्य के महाधिवक्ता डी एस आर मूर्ति को उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर कर फैसले को चुनौती देने का निर्देश दिया।
वाम मोर्चे ने एक फरवरी को नौकरियों में अल्पसंख्यकों के आरक्षण के लिए रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों का समर्थन किया था। मोर्चे के अध्यक्ष विमान बोस ने कहा था कि धर्म के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मुस्लिमों के लिए जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि यह घोषणा मई जून में कोलकाता नगर निगम और 82 नगरपालिकाओं के लिए होने वाले चुनावों के पहले की गयी है। स्थानीय निकाय चुनावों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के पूर्व सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है।

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