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चीनी डॉप्लर रडार की एक फाइल फोटो।
चीन से आयातित डॉप्लर रडार को मुंबई में लगाये जाने पर नौसेना की आपत्ति के बाद सरकार अब इस क्षेत्र में दूसरा रडार लगाएगी और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव शैलेश नायक ने कहा कि रक्षा विभाग की ओर से मुंबई में डॉप्लर रडार लगाए जाने के विषय में आपत्ति की गई थी। इन आपत्तियों के बाद हम यहां दूसरा रडार लगाएंगे और इस विषय में प्रक्रिया को कुछ ही समय में अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
गौरतलब है कि मौसम की बेहतर भविष्यवाणी के लिए मुंबई में चीन से आयातित डॉप्लर रडार लगाए जाने के दौरान नौसेना के अधिकारियों ने चीनी तकनीशियनों को निर्धारित स्थान पर प्रवेश करने से रोक दिया था क्योंकि यह इलाका नौसेना के अधीन है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा इस मामले में नौसेना के मंजूरी प्राप्त करने का प्रयास किया गया था, लेकिन अनुमति नहीं प्राप्त होने पर इसे दिल्ली लाया गया है।
मुंबई से लाए गए इस डॉप्लर रडार को दिल्ली के पालम क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि मुंबई में अब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से प्राप्त रडार को स्थापित किए जाने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि मौसम की सटीक भविष्यवाणी के लिए देश के विभिन्न क्षेत्र में रडार स्थापित किए जाने की योजना के तहत भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड दो रडार उपलब्ध करा रहा है।
बहरहाल, नायक ने कहा मौसम के पूर्वानुमान को सटीक बनाने के लिए इस वर्ष देश के विभिन्न क्षेत्रों में 10 से 12 डॉप्लर रडार लगाए जाने की योजना है। इसके तहत प्रत्येक माह में एक रडार स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस रडार के स्थापित होने से गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में काफी लाभ होगा, जहां कृषि और उससे जुड़ी व्यवस्था मौसम पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि हम मौसम के बारे में सटीक आकलन और पूर्वानुमान के लिए आधुनिकीकरण योजना को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। इस दिशा में दिल्ली में हाल ही में हाई परफॉर्मिंग कम्प्यूटिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पुणे में आटोमेटेड वेदर सिस्टम स्थापित किया जा रहा है, जबकि नोएडा में जल्द ही मध्यम क्षमता की मौसम आकलन प्रणाली स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा राडार और कम्प्यूटिंग प्रणाली से मौसम का पूर्वानुमान एक उभरता हुआ विज्ञान है और इस क्षेत्र में हमें अभी काफी आगे जाना है।

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