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विपक्ष के दबाव के आगे झुकते हुए राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के इरादे से सरकार ने शुक्रवार को गन्ना आध्यादेश में संशोधन का निर्णय किया है।
नई गन्ना मूल्य नीति को लेकर विपक्षी दलों और किसानों के विरोध के सामने झुकते हुए सरकार ने गन्ने की पूर्व की कीमत लागू करने का फैसला किया है।
लोकसभा में सदन के नेता और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे का समाधान निकाला गया। सरकार ने गन्ने की कीमत को लेकर संसद में एक नया विधेयक लाने का भी फैसला किया है।
बैठक के बाद राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह ने कहा कि पूर्व की गन्ना मूल्य नीति फिर लागू की गई है जिसके तहत गन्ने का भाव राज्य सरकारें तय कर सकेंगी।
अजित सिंह ने कहा कि किसानों को फेयर एवं रिम्युनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) से ज्यादा कीमत मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस बारे में एक नया विधेयक लाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा सुझाई गई कीमत और केंद्र सरकार की कीमत के बीच के अंतर का भुगतान मिल मालिक करेंगे।
अजित सिंह ने यह भी कहा कि किसानों का आंदोलन खत्म हो गया है और सोमवार से संसद सुचारू रूप से चलेगी।
बैठक के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार ने राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) को लागू करने का फैसला किया है। हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं क्योंकि इससे संविधान के संघीय ढांचे को टूटने से बचाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि इस विवादित फैसले को बदलने का वास्तविक श्रेय प्रदर्शनकारी किसानों को दिया जाना चाहिए, जिन्होंने फैसले को बदलने के लिए सरकार पर दबाव बनाया।
रेल मंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि संप्रग की सरकार किसानों की हिमायती है। उन्होंने कहा कि संप्रग के नेता शुक्रवार सुबह मिले थे जिसमें अध्यादेश के विवादित हिस्से को हटाने का फैसला लिया गया।

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