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केन्द्र सरकार ने गन्ने के मूल्य के मुद्दे और अन्य मुद्दों पर विचार विमर्श के लिए सोमवार सुबह एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
केंद्र सरकार द्वारा गन्ना मूल्य तय किए जाने के मुद्दे पर शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन विपक्षी दलों ने संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में व्यवधान डाला। जिसके चलते संसद की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विवाद को गहराते देखते हुए शुक्रवार को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आपात बैठक बुलाई है। बैठक में गृह मंत्री पी चिदंबरम, कृषि मंत्री शरद पवार और कानून मंत्री वीरप्पा मोइली हिस्सा लेंगे। बैठक की अध्यक्षता प्रणव मुखर्जी करेंगे।
गुरुवार को भी कृषि मंत्री शरद पवार के घर पर एक आपात बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में भी पी चिदंबरम मौजूद थे। शरद पवार ने गुरुवार को कहा था कि वह गन्ना मूल्यों पर पुर्नविचार के लिए तैयार हैं।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने गन्ना मूल्य नियंत्रण संशोधन अध्यादेश 2009 के तहत गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 129 रूपए 85 पैसे प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जिसके खिलाफ किसान आंदोलन पर उतर आए हैं।
गुरुवार को भी शीतकालीन सत्र के पहले दिन विपक्षी दलों ने सदन में भारी हंगामा खड़ा किया था, जिसके कारण सदन को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया था।
राष्ट्रीय लोकदल के आह्वान पर गुरुवार को जंतर मंतर पर आयोजित गन्ना किसानों की एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), जनतादल-यू और वामपंथी दलों और कई अन्य पार्टियों के नेताओं ने कहा कि केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार किसान विरोधी है। नेताओं ने कहा कि आम चुनाव से कुछ समय पहले किसानों का ऋण माफ करने वाली सरकार ने गन्ना के न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने वाला अध्यादेश लाकर अपनी काली नीति उजागर कर दी है जिसका हर स्तर पर पुरजोर विरोध किया जाएगा।
विपक्षी दलों के तेवर को देखते हुए अभी शीतकालीन सत्र में सदन में हंगामा जारी रहने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही कोड़ा मुद्दा, महंगाई और चीनी घुसपैठ पर कड़े तेवर दिखा दिए हैं।

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