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परमाणु करार में अहम भूमिका निभाने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बुश को मनमोहन सिंह ने पक्का दोस्त करार दिया है।
परमाणु क्षेत्र में 34 वर्ष तक भारत के अलगाव को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत का पक्का दोस्त बताया है।
सिंह ने हिन्दुस्तान लीडरशिप समिट में कहा कि असैन्य परमाणु सहयोग की सफल पहल में हम भारत के लोग बुश की महत्वपूर्ण भूमिका को मानते हैं। शनिवार को समिट को बुश भी संबोधित करेंगे। उन्होंने एक साल पहले बुश से कहा था कि भारत के लोग आपको काफी प्रेम करते हैं।
सिंह और बुश ने 18 जुलाई 2005 को असैन्य परमाणु समझौता कर ऐतिहासिक फैसला किया, जिससे भारत पर असैन्य परमाणु कारोबार के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह ( एनएसजी) के प्रतिबंध उठ गये।
एनएसजी के फैसले के बाद भारत ने सात देशों अमेरिका, रूस, फ्रांस, मंगोलिया, नामीबिया, कजाखस्तान और अर्जेण्टीना से असैन्य परमाणु करार किए। सिंह ने कहा, हम अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर अपने परमाणु बिजली कार्यक्रम को गति प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं। यह स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल के हमारे प्रयास में महत्वपूर्ण योगदान होगा और इससे जलवायु परविर्तन के खतरों से भी निपटा जा सकेगा । दिलचस्प बात यह है कि सिंह दस महीने पुराने बराक ओबामा प्रशासन के पहले सरकारी मेहमान होंगे।
बुश प्रशासन के समय पिछले साल वाशिंगटन गए सिंह ने उनसे कहा था कि पिछले साढ़े चार साल से मैं प्रधानमंत्री हूं और मुझे आपका पूरा प्यार और दोस्ती नसीब हुई है । इसका मेरे लिए और भारत की जनता के लिए बहुत बडे़ मायने हैं।
सिंह ने कहा कि जब इतिहास लिखा जाएगा, मुझे लगता है उसमें दर्ज होगा कि राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने हमारे दो लोकतंत्रों को एक दूसरे के करीब लाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
आज समिट में सिंह ने कहा कि वह महान परमाणु वैज्ञानिक होमी भाभा की जन्मशती के मौके पर बोल रहे हैं, जिन्होंने परमाणु को शांतिपूर्ण ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने का सपना देखा था।
उन्होंने कहा कि असैन्य परमाणु समझौता कर हमने जनता के कल्याण के लिए परमाणु के इस्तेमाल की दिशा में पहल की है और डॉ. भाभा के सपने को पूरा करने का प्रयास किया है।

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