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जिन्ना मुद्दे पर भाजपा ने कड़े अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए पार्टी ने वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को पार्टी की सदस्यता से निष्कासित कर दिया
जिन्ना मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़े अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए पार्टी ने वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को पार्टी की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया। जसवंत सिंह ने अपनी किताब में पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना की प्रशंसा की थी।
इससे पहले जसवंत सिंह को फोन करके कहा गया था कि वह पार्टी की चिंतन बैठक में न आएं। हालांकि पहले यह कहा जा रहा था कि तबियत खराब होने के कारण वह चिंतन बैठक में शिरकत नहीं कर पाएंगे। लेकिन पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने चिंतन बैठक के बीच में पत्रकारों को जसवंत सिंह को पार्टी से बाहर निकाले जाने की खबर दी।
इससे पहले राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में कहा था कि जसवंत सिंह द्वारा उनकी पुस्तक जिन्ना-भारत, विभाजन, स्वतंत्रता में व्यक्त विचार पार्टी के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। पार्टी तो पुस्तक के विचारों से अपने को पूरी तरह अलग करती है।
जसवंत ने अपनी पुस्तक में देश के विभाजन के लिए कांग्रेस नेता और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि भारत में जिन्ना को दुष्टात्मा के रूप में पेश किया गया है।
उधर राजनाथ ने कहा था कि जिन्ना ने भारत के विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे बड़े पैमाने पर लाखों की तादाद में लोग विस्थापित हुए। उन्होंने कहा कि यह जाना माना तथ्य है और हम इतिहास के उस दुखदायी चरण को भुला नहीं सकते।
जसवंत द्वारा सरदार पटेल को भी विभाजन का जिम्मेदार बताने पर भाजपा अध्यक्ष ने सख्त आपत्ति करते हुए कहा था कि देश के पहले गृह मंत्री ने भारत की एकता और अखंडता को व्याप्त बड़े खतरे की घड़ी में देश को एक बनाए रखने और उसका सुदृढ़ीकरण करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। राजनाथ ने कहा कि पटेल की दूरदृष्टि और साहस से हम हमेशा गौरान्वित रहेंगे और संपूर्ण देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
उधर कांग्रेस ने भी कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यदि अपने नेता जसवन्त सिंह के जिन्ना संबंधी मत से सहमत नहीं हैं तो उन्हें पार्टी से बाहर निकाले।

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