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ब्रांडेड शहद से सावधान रहें: अध्ययन
विशेष संवाददाता, नई दिल्ली First Published:15-09-10 10:47 PMLast Updated:16-09-10 01:36 AM
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यदि आप अपने बच्चों को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए शहद चटा रहे हों तो सावधान हो जाइए। शहद की इस मिठास में ऐसा कसैलापन छुपा है, जो बच्चों में इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पैदा कर देगा। जी हां, मधुमक्खियों से निकलने वाले शहद में एक नहीं छह एंटीबायोटिक दवाएं घुल चुकी हैं, जो सुपरबग का भी कारण हो सकता है।

देश में शहद के 12 मशहूर ब्रांडों के नमूनों की जांच में 11 नमूनों में एंटीबायोटिक की मात्र पाई गई है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने ये नमूने डाबर, हिमालय ड्रग कंपनी, बाबा रामदेव की पांतजलि फार्मेसी, बैद्यनाथ, खादी ग्रामोद्योग, वर्धमान फूड एंड फार्मास्युटिकल, उद्योग भारती, फूड मैक्स, मेहसंस इंडिया के लिए थे। एक छोटी कंपनी हितकारी को छोड़कर आस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड के मशहूर ब्रांडों कैपिलानो और नेक्टाफ्लोर में भी भारी मात्रा में एंटीबायोटिक मिले।

सीएसई की निदेशक सुनीता नारायण और अध्ययन के प्रमुख चंद्रभूषण ने बताया कि इनमें छह एंटीबायोटिक आक्सीटेट्रासाइक्लीन, क्लोरामफेनीकोल, एंपीसिलीन, एनरोफ्ल्क्सासिन, सिप्रोप्लोक्सोसिन और एरिथ्रोमाइसिन की जांच की गई। हितकारी को छोड़कर सभी में दो से पांच तक एंटीबायोटिक 10 से लेकर 614 माइक्रोग्राम प्रति किग्रा तक पाए गए। इनमें से क्लोरामफेनीकोल एंटीबायोटिक पर यूरोप में प्रतिबंधित है। देश में शहद में एंटीबायोटिक की सीमा मानक नहीं हैं जबकि विदेशों में मानक बने हैं।

 
 
 
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