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महिलाओं के जननांग में विकृति लाने के खिलाफ UN में प्रस्ताव पारित
संयुक्त राष्ट्र, एजेंसी
First Published:27-11-12 01:13 PM
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्त्रियों की जननेंद्रियों में विकृति लाए जाने के खिलाफ अपना पहला निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया है। इस प्रचलन के विरोधियों का कहना है कि दुनिया भर में 14 करोड़ महिलाओं को इसे झेलना पड़ता है।
इस कुप्रथा में युवा लड़कियों की जननेंद्रियों का कुछ भाग हटा दिया जाता है और माना जाता है कि इससे उस लड़की की कामुकता घटेगी और वह पूरी तरह शालीन रहेगी। ऐसा माना जाता है कि प्रति वर्ष तीस लाख महिलाओं और लड़कियों में बलपूर्वक इस विकृति को लाया जाता है।
बहुत से देशों में गैरकानूनी घोषित हो चुकी इस प्रथा की शुरुआत अफ्रीकी और मध्यपूर्व देशों में हुई थी। इस प्रथा की संयुक्त राष्ट्र में कल व्यापक स्तर पर निंदा की गई।
50 अफ्रीकी देशों समेत 110 से भी ज्यादा देशों ने महासभा की अधिकार समिति में इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इस समिति ने इस प्रथा को समाप्त करने के लिए जागरुकता लाने वाली शैक्षणिक प्रक्रियाओं के साथ-साथ पूरक दंडात्मक प्रावधानों की मांग की।
इस प्रचलन को खत्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संयुक्त राष्ट्र में इटली के राजदूत सीजेर रागाग्लिनी ने कहा, अंतिम लक्ष्य (एक पीढ़ी की स्त्रियों में जननांगीय विकृति की प्रथा खत्म करना) हासिल करने तक हम अपने प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। आज यह लक्ष्य पहले के मुकाबले काफी निकट प्रतीत होता है।
व्यापक विरोध के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव को शक्तिशाली हथियार बताते हुए उन्होंने कहा कि यह निंदा और नए उपायों को अगले स्तर तक ले जाने का आहवान करेगा। रागाग्लिनी ने कहा कि अब यह हम लोगों पर निर्भर है कि हम किस तरह इसका प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करें।
इस कुप्रथा में युवा लड़कियों की जननेंद्रियों का कुछ भाग हटा दिया जाता है और माना जाता है कि इससे उस लड़की की कामुकता घटेगी और वह पूरी तरह शालीन रहेगी। ऐसा माना जाता है कि प्रति वर्ष तीस लाख महिलाओं और लड़कियों में बलपूर्वक इस विकृति को लाया जाता है।
बहुत से देशों में गैरकानूनी घोषित हो चुकी इस प्रथा की शुरुआत अफ्रीकी और मध्यपूर्व देशों में हुई थी। इस प्रथा की संयुक्त राष्ट्र में कल व्यापक स्तर पर निंदा की गई।
50 अफ्रीकी देशों समेत 110 से भी ज्यादा देशों ने महासभा की अधिकार समिति में इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इस समिति ने इस प्रथा को समाप्त करने के लिए जागरुकता लाने वाली शैक्षणिक प्रक्रियाओं के साथ-साथ पूरक दंडात्मक प्रावधानों की मांग की।
इस प्रचलन को खत्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संयुक्त राष्ट्र में इटली के राजदूत सीजेर रागाग्लिनी ने कहा, अंतिम लक्ष्य (एक पीढ़ी की स्त्रियों में जननांगीय विकृति की प्रथा खत्म करना) हासिल करने तक हम अपने प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। आज यह लक्ष्य पहले के मुकाबले काफी निकट प्रतीत होता है।
व्यापक विरोध के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव को शक्तिशाली हथियार बताते हुए उन्होंने कहा कि यह निंदा और नए उपायों को अगले स्तर तक ले जाने का आहवान करेगा। रागाग्लिनी ने कहा कि अब यह हम लोगों पर निर्भर है कि हम किस तरह इसका प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करें।
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