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'मौत के समय लड़ने से डर गया था लादेन'
वाशिंगटन, एजेंसी
First Published:03-05-12 01:13 PM
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ओसामा बिन लादेन हमेशा यह कहता रहा कि वह लड़ते हुए मरना पसंद करेगा, लेकिन जब बीते साल ऐबटाबाद के परिसर में अमेरिकी कमांडो ने उसे घेर लिया तो दुनिया के इस सबसे खूंखार आतंकी ने जरा भी प्रतिरोध नहीं जताया।

यह दावा "मैनहंट: द टेन इयर सर्च फार बिन लादेन-फ्रॉम 9/11 टू ऐबटाबाद" नामक पुस्तक में किया गया है। पीटर बर्गेन द्वारा लिखी यह पुस्तक इसी सप्ताह बाजार में आई है।

वाशिंगटन स्थिति थिंक-टैंक न्यू अमेरिका फाउंडेशन के निदेशक और राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ बर्गेन ने अपनी इस पुस्तक में ओसामा के खिलाफ अमेरिकी सुरक्षा बलों की ओर से चलाए गए अभियान के कुछ घंटों को लेकर नयी जानकारियां सामने लाई हैं।

इसमें बर्गेन लिखते हैं, 54 साल का ओसामा एक दशक तक छिपते रहने के दौरान थक गया होगा। उसके पास भागने की कोई वास्तविक योजना नहीं थी और मकान से बाहर निकलने का कोई गुप्त रास्ता नहीं था। शायद उसने उम्मीद की थी कि उसे कोई चेतावनी मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पुस्तक में कहा गया है, ओसामा के कमरे में ही एके-47 और माकारोव पिस्तौल रखी हुई थी, लेकिन वह इन हथियारों तक नहीं पहुंचा। इसकी बजाय उसने दरवाजा खुला छोड़ दिया और इसका नतीजा यह हुआ कि उसके बाहर निकलने के सभी रास्ते बंद हो गए। इसके तत्काल बाद ही उसके कमरे तक सील के जवान पहुंच गए।

बर्गेन ने कहा, ओसामा ने अंदर से दरवाजा नहीं बंद करके अपने लिए गलती की और इससे सील के जवान तत्काल उसके नजदीक पहुंच गए। उसके कमरे तक पहुंचने में सील के जवानों को ज्यादा वक्त नहीं लगा।

वह लिखते हैं, अपने कमरे में कुछ अनजान लोगों के दाखिल होने की आहट सुनकर ओसामा की बीवी अमाल अरबी में कुछ चिल्लाई और फिर अपने शौहर के सामने आकर खड़ी हो गई। लेखक आगे बताते हैं, सील के एक जवान ने आमला को इस आशंका के साथ धक्का दिया कि उसने आत्मघाती बम तो नहीं पहन रखा है। इसके तत्काल बाद एक अन्य जवान ने ओसामा की बीवी की पिंडली में गोली मार दी, जिसके बाद वह उसी जगह गिर गई।

इस पुस्तक में सबसे चौंकाने वाली बात यह की गई है, ओसमा ने कोई प्रतिरोध नहीं जताया। उसकी छाती और बाईं आंख पर गोली मारी गई। कमरे में मौजूद बेड पर ओसामा का खून फैल गया। इस अभियान पर लाइव नजर बनाए राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि हमने उसे पा लिया। इस दौरान कोड वर्ड जेरोनिमो कहा गया।

 
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टिप्पणियाँ
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टिप्पणियॉ पढ़े(2)
दुसरो का सहारा लाकर बन्दूक चलने वाले कम्जूर ही होता HA
By SACHIN (4th-May-2012 06:34:PM)
मियां ये कोई चंद्रशेखर रामप्रसाद बिस्मिल या भगत सिंह तो हैं नहीं जो हँसते -हँसते मौत को गले लगा लें ,लादेन जैसे नपुंसक व मानवता के हत्यारे जब मौत को सामने देखते हैं तो जिहाद की बड़ी-बड़ी बातें भूल कर अपनी जान की भीख ही मांगते हैं
By khoji pandit (3rd-May-2012 04:49:PM)
 
 

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