मंगलवार, 27 जनवरी, 2015 | 19:52 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
ब्रेकिंग
देवघर कोर्ट ने भड़काऊ भाषण मामले में केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ सम्मन जारी किया।मुजफ्फरपुर: ट्रेन इंजन से टकराई कार, एक की मौत।कोली की फांसी रोकने संबंधी याचिका पर सुनवाई पूरी, कल आएगा फैसला।दुकान के खुलने पर चला चोरी का पता।पटनाः दवा दुकान में 30 लाख की चोरी।
चाय की दुकान से चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का सफर
गांधीनगर, एजेंसी First Published:20-12-12 02:44 PMLast Updated:20-12-12 10:25 PM
Image Loading

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को एक मध्यवर्गीय परिवार में मेहसाणा जिले के चडनगर में हुआ था। पिछले 10 साल से राज्य के मुख्यमंत्री रहे मोदी ने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। अपने प्रारंभिक काल में वह अपने पिता और भाई को चाय की स्टाल चलाने में मदद करते थे।

कालेज के दिनों में मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता थे। गुजरात में भाजपा की नींव डालने में मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शंकरसिंह बाघेला और केशुभाई पटेल के साथ साथ मोदी ने भी राज्य में भाजपा को गांव गांव तक पहुंचाया। वाघेला और मोदी एक दूसरे के पूरक माने जाते थे। वाघेला एक जननेता के रुप में जाने जाते थे, जबकि मोदी पर्दे के पीछे संगठन का काम करते थे।

1995 में जब भाजपा गुजरात में अपने बलबूते पर सत्ता में आई, तब वाघेला और मोदी के बीच टकराव हुआ। इस बीच मोदी ने पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथयात्रा और मुरली मनोहर जोशी की कन्याकुमारी से कश्मीर की रथयात्रा का सफल संचालन करके अपना संगठनात्मक कौशल साबित कर दिया।

शीघ्र ही मोदी को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। उन्हें पांच राज्यों का भार सौंपा गया। 1998 में उन्हें गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पार्टी का चुनाव प्रचार का कार्य सौंपा गया, जो उन्होंने सफलतापूर्वक किया।

राज्य में विनाशकारी भूकंप और 2001 के उपचुनावों में भाजपा की हार के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल को पार्टी ने पदच्युत किया गया और राज्य की बागडौर मोदी को सौंप दी। मोदी उन कुछ मुख्यमंत्रियों में से हैं, जो चुनाव लड़े बिना मुख्यमंत्री बने।

गोधराकांड और उसके बाद की हिंसा से गुजरात और मोदी की छवि पर दाग लगा। परन्तु उसके बाद के चुनावों में भाजपा को 127 सीटों के साथ भारी बहुमत मिला। वर्ष 2007 में उन्होंने फिर पार्टी को विजयी बनाया।

परन्तु उनके प्रधानमंत्री बनने की राह में गोधरा दंगे मुख्य अड़चन के रूप में खड़े हैं। हालांकि उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल टीम ने उन्हें गोधराकाण्ड में निर्दोष करार दिया है। परन्तु उनके खिलाफ दंगा पीड़ितों को न्याय नहीं दिलाने का आरोप तो है ही।

 
 
 
टिप्पणियाँ
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड