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रोवर ने मंगल की मिट्टी में खोजा जीवन का सुराग
शिकागो, एजेंसी
First Published:04-12-12 10:59 AM
मंगल की सतह पर उतरे क्यूरोसिटी रोवर ने अत्यधिक जिज्ञासा जगा देने वाले कुछ ऐसे सबूत पेश किए हैं, जो इस लाल ग्रह पर रहे जीवन की ओर इशारा करते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ने कहा है कि मंगल की सतह की मिट्टी के पहले विश्लेषण से इतना बड़ा निष्कर्ष निकाल लेना थोड़ा जल्दबाजी भरा कदम होगा।
नासा के सैंपल एनालिसिस एट मार्स (मंगल पर नमूना विश्लेषण) उपकरण मंगल पर मीथेन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन आदि की खोज करते हुए उनके बारे में सूचनाएं धरती पर भेज रहे हैं। ये पदार्थ जीवन की मौजूदगी के मुख्य अवयव हैं।
मंगल की उपरी सतह की मिट्टी से निकाले गए सरल कार्बनिक यौगिकों की पहचान के बाद शोधकर्ता बहुत उत्साहित हैं। लेकिन उन्होंने यह भी ध्यान में रखा है कि संभवत: कार्बन के ये अवशेष उल्कापिंडों से गिरे हों या फिर पथ्वी से प्रक्षेपित होते समय इस यंत्र में कुछ कार्बन कण लग गए हों।
अब क्यूरोसिटी रॉकनेस्ट की रेतीली और बंजर जमीन से माउंट शार्प (मंगल की सतह पर एक पहाड़) की ओर बढ़ रहा है ताकि वह गहराई तक खुदाई के लिए बेहतर जगह खोज सके। ऐसे में वैज्ञानिकों को और कार्बनिक यौगिकों के सबूत मिलने की उम्मीद है।
नासा से जुड़े क्यूरोसिटी के नमूना विश्लेषक पॉल माहाफी ने कहा कि यह कोई असंभव बात नहीं है कि रेत के जमाव में काफी सारे कार्बनिक पदार्थ हों। यह मंगल के कठोर वातावरण के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि पहले कभी इस कठोर वातावरण के संपर्क में आने से बचे रहे वातावरण की खोज करना बहुत मजेदार होगा।
खुदाई में निकाली गई रेत की अदभुत तस्वीरें उपकरणों में कैद की गई हैं। इन्हें एक अनुसंधानकर्ता ने आटे से मोटा लेकिन चीनी के दाने से पतला बताया है। क्यूरोसिटी रेत में शामिल क्रिस्टलों और अन्य पदार्थों का विश्लेषण करने में भी सक्षम है। इकट्ठे किए गए नमूनों को गर्म करके वह उस रेत में पानी, कार्बनडाई ऑक्साइड, ऑक्सीजन और सल्फर डाई ऑक्साइड की पर्याप्त मात्रा पता लगाने में भी सक्षम है।
नासा के मंगल अन्वेषण कार्यक्रम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल मेयर ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि क्यूरोसिटी रोवर एक तरह से पहियों पर चलती-फिरती प्रयोगशाला है। उन्होंने कहा कि ये परिणाम उस इलाके में रासायनिक विविधता की एक झलक पेश करते हैं जो बाकी पूरे ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वैज्ञानिक क्यूरोसिटी से मंगल पर किसी एलियन या जीवित प्राणी की खोज की उम्मीद नहीं करते हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वह लाल ग्रह की मिट्टी और चट्टानों का विश्लेषण करके उन अवयवों को खोज सकेगा जो जीवन के लिए जरूरी हैं। इससे पहले कभी मंगल पर रहे जीवन की पहेली सुलझ सकेगी।
ढाई अरब अमेरिकी डॉलर का यह क्यूरोसिटी रोवर बीते छह अगस्त को मंगल की सतह पर उतरा था। इसका उद्देश्य मंगल के वातावरण का अध्ययन करना है ताकि आने वाले कुछ सालों में वहां मानव अभियान की तैयारी की जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2030 तक मंगल पर इंसान को भेजने का वादा किया है।
नासा के सैंपल एनालिसिस एट मार्स (मंगल पर नमूना विश्लेषण) उपकरण मंगल पर मीथेन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन आदि की खोज करते हुए उनके बारे में सूचनाएं धरती पर भेज रहे हैं। ये पदार्थ जीवन की मौजूदगी के मुख्य अवयव हैं।
मंगल की उपरी सतह की मिट्टी से निकाले गए सरल कार्बनिक यौगिकों की पहचान के बाद शोधकर्ता बहुत उत्साहित हैं। लेकिन उन्होंने यह भी ध्यान में रखा है कि संभवत: कार्बन के ये अवशेष उल्कापिंडों से गिरे हों या फिर पथ्वी से प्रक्षेपित होते समय इस यंत्र में कुछ कार्बन कण लग गए हों।
अब क्यूरोसिटी रॉकनेस्ट की रेतीली और बंजर जमीन से माउंट शार्प (मंगल की सतह पर एक पहाड़) की ओर बढ़ रहा है ताकि वह गहराई तक खुदाई के लिए बेहतर जगह खोज सके। ऐसे में वैज्ञानिकों को और कार्बनिक यौगिकों के सबूत मिलने की उम्मीद है।
नासा से जुड़े क्यूरोसिटी के नमूना विश्लेषक पॉल माहाफी ने कहा कि यह कोई असंभव बात नहीं है कि रेत के जमाव में काफी सारे कार्बनिक पदार्थ हों। यह मंगल के कठोर वातावरण के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि पहले कभी इस कठोर वातावरण के संपर्क में आने से बचे रहे वातावरण की खोज करना बहुत मजेदार होगा।
खुदाई में निकाली गई रेत की अदभुत तस्वीरें उपकरणों में कैद की गई हैं। इन्हें एक अनुसंधानकर्ता ने आटे से मोटा लेकिन चीनी के दाने से पतला बताया है। क्यूरोसिटी रेत में शामिल क्रिस्टलों और अन्य पदार्थों का विश्लेषण करने में भी सक्षम है। इकट्ठे किए गए नमूनों को गर्म करके वह उस रेत में पानी, कार्बनडाई ऑक्साइड, ऑक्सीजन और सल्फर डाई ऑक्साइड की पर्याप्त मात्रा पता लगाने में भी सक्षम है।
नासा के मंगल अन्वेषण कार्यक्रम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल मेयर ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि क्यूरोसिटी रोवर एक तरह से पहियों पर चलती-फिरती प्रयोगशाला है। उन्होंने कहा कि ये परिणाम उस इलाके में रासायनिक विविधता की एक झलक पेश करते हैं जो बाकी पूरे ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वैज्ञानिक क्यूरोसिटी से मंगल पर किसी एलियन या जीवित प्राणी की खोज की उम्मीद नहीं करते हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वह लाल ग्रह की मिट्टी और चट्टानों का विश्लेषण करके उन अवयवों को खोज सकेगा जो जीवन के लिए जरूरी हैं। इससे पहले कभी मंगल पर रहे जीवन की पहेली सुलझ सकेगी।
ढाई अरब अमेरिकी डॉलर का यह क्यूरोसिटी रोवर बीते छह अगस्त को मंगल की सतह पर उतरा था। इसका उद्देश्य मंगल के वातावरण का अध्ययन करना है ताकि आने वाले कुछ सालों में वहां मानव अभियान की तैयारी की जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2030 तक मंगल पर इंसान को भेजने का वादा किया है।
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