गुरुवार, 02 जुलाई, 2015 | 09:16 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
Image Loading    भूमि विधेयक पर एनडीए में दरार, शिवसेना और अकाली दल को आपत्ति भैंस और मुर्गियों के बाद अब यूपी पुलिस को है 'चुड़ैल' की तलाश यूपी: नौकरी का झांसा देकर छात्रा के साथ किया रेप, बनाया वीडियो ललित मोदी मामले में हुए इन नए खुलासों से कांग्रेस और बीजेपी दोनों परेशान, आईं आमने-सामने अब मोबाइल फोन से डायल हो सकेगा लैंडलाइन नंबर गोद से गिरी बच्ची, बचाने के लिए मां भी चलती ट्रेन से कूदी बलात्कार मामलों में कोई समझौता नहीं, औरत का शरीर उसके लिए मंदिर के समान होता है: सुप्रीम कोर्ट अब यूपी पुलिस 'चुड़ैल' को ढूंढेगी, जानिए क्या है पूरा मामला  खुलासा: एक रुपया तैयार करने का खर्च एक रुपये 14 पैसे दार्जिलिंग: भूस्‍खलन के कारण 38 लोगों की मौत, पीएम ने जताया शोक, 2-2 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान
गंदे बिस्तर पर सोते हैं ब्रिटेन के लोग
लंदन, एजेंसी First Published:08-01-13 10:34 PM
Image Loading

बिछावन की चादर महीने में कम से कम एक बार तो बदल ही देनी चाहिए। ऐसा नहीं करने पर अस्थमा, एक्जीमा और राइनिटिस होने का खतरा रहता है। यह बात एक अध्ययन में कही गई। अध्ययन में यह भी बताया गया कि ब्रिटेन में आधे से अधिक लोग गंदे बिछावन पर सोते हैं।

समाचार पत्र डेली मेल के मुताबिक लंदन के एक प्रमुख शैक्षणिक अस्पताल में पेडियाट्रिक एलर्जिस्ट एड़ा फॉक्स ने चेतावनी दी कि बिछावन की गंदी चादरों से स्वास्थ्य को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अध्ययन में 2000 से अधिक लोगों का सर्वेक्षण किया गया। इसमें पता चला कि ब्रिटेन में आधे से अधिक लोग बिछावन की गंदी चादर पर सोते हैं और नियमित रूप से चादर नहीं बदलने के लिए महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक दोषी हैं।

फॉक्स ने कहा कि हमारे शरीर से रोज लाखों त्वचा की मृत कोशिकाएं झड़ती हैं। बड़ी संख्या में ये बिस्तर में जमा हो जाती हैं। इसके साथ ही हमारे शरीर से द्रव्यों, पसीने और तेल का रिसाव होता है। इनके कारण चादरों की तरफ धूल खाने वाले कीटाणु बड़ी मात्रा में आकर्षित होते हैं।

सांस के माध्यम से शरीर में जाने पर पर ये कीटाणु अस्थमा, राइनिटिस पैदा कर सकते हैं और एक्जीमा को बढ़ा सकते हैं।

 

 
 
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
क्रिकेट स्कोरबोर्ड