सोमवार, 24 नवम्बर, 2014 | 00:10 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
इस साल सुर्खियों का हिस्सा बन गए ये 10 चेहरे...
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:28-12-12 03:14 PM
Image Loading

इस वर्ष कुछ चेहरे अचानक सुर्खियों का हिस्सा बन गए। इनके नाम की चर्चा पहले भी होती रहती थी, लेकिन इस वर्ष कुछ असाधारण गतिविधियों अथवा उपलब्धियों के कारण इनके नाम की खास चर्चा हुई।

1. अखिलेश यादव: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले अखिलेश यादव मार्च में राज्य के 33वें मुख्यमंत्री बने। वह देश की सर्वाधिक आबादी वाले राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री हैं। ऑस्ट्रेलिया से पर्यावरण इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त अखिलेश की सुनियोजित चुनाव प्रचार नीति की वजह से 403 सदस्यीय विधानसभा में सपा को 224 सीटें मिलीं।

2. अरविंद केजरीवाल: पिछले साल प्रख्यात गांधीवादी समाज सेवक अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में उनके सहायक रहे अरविंद केजरीवाल ने इस साल अक्टूबर में न केवल अपनी राजनीतिक पार्टी गठित की, बल्कि भ्रष्टाचार के समूल खात्मे के ऐलान के साथ ही सरकार से जुड़े लोगों पर धुआंधार आरोप लगाए। महंगाई के खिलाफ भी केजरीवाल ने जबरदस्त मुहिम छेड़ी, धरने आंदोलन किए और जेल भी गए।

3. रॉबर्ट वाड्रा: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा इस साल अपने कारोबार को लेकर सुर्खियों में रहे और केजरीवाल ने उन पर सत्ता से नजदीकी की वजह से अनावश्यक लाभ हासिल करने का आरोप लगाया।

4. अशोक खेमका: हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका भी चर्चा में रहे, जिन्होंने वाड्रा के डीएलएफ के साथ सौदों की जांच का आदेश दिया, जिसके बाद उनका तबादला कर दिया गया। खेमका ने उनके तबादले के बाद प्रमुख रियल्टी समूह डीएलएफ को वाड्रा की तीन एकड़ जमीन की बिक्री को रद्द कर दिया।

5. वीके सिंह: इस साल मई में सेवानिवृत्त हुए तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने अपनी उम्र संबंधी विवाद को लेकर सरकार को उच्चतम न्यायालय में खींचा। हालांकि, वह 10 फरवरी को यह लड़ाई हार गए और उन्हें अपनी याचिका वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने अपने सेना के कुछ अधिकारियों पर भी आरोप लगाए, जिनकी जांच चल रही है। जनरल सिंह 31 मई को सेवानिवत्त हो गए। उन्हें मिली जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा साल के आखिर में वापस लेने का फैसला भी हो गया।

6. असीम त्रिवेदी: कानपुर के कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को राजद्रोह के आरोप में 8 सितंबर को गिरफ्तार किया गया और जनाक्रोश के बीच उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद उन्हें 12 सितंबर को रिहा किया गया। बंबई उच्च न्यायालय ने त्रिवेदी को तुच्छ आधार पर तथा बिना सोचे समझे गिरफ्तार करने के लिए मुंबई पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि उसकी कार्रवाई से असीम की बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है।

7. जी माधवन नायर: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर तथा तीन अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों को इसरो द्वारा नियुक्त समिति ने एंट्रिक्स देवास सौदे मामले में दोषी पाया। इन चारों को सरकारी पद ग्रहण करने से वंचित भी कर दिया गया।

8. दिनेश त्रिवेदी: तृणमूल कांग्रेस के नेता दिनेश त्रिवेदी ने रेल बजट में रेलगाड़ियों का भाड़ा क्या बढ़ाया, उनकी पार्टी ने भाड़ा वापस लेने की मांग के साथ-साथ उनके इस्तीफे की मांग कर डाली। आखिरकार, त्रिवेदी को इस्तीफा देना ही पड़ा।

9. वीरभद्र सिंह: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को न भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विपक्षी शिकस्त दे पाए और न ही कांग्रेस की कलह नुकसान पहुंचा सकी। अपने जबरदस्त प्रचार अभियान के बाद वीरभद्र कांग्रेस को विधानसभा चुनावों में राज्य में फिर सत्ता में वापस ले आए और एक रिकॉर्ड बनाते हुए 78 वर्षीय इस नेता ने 25 दिसंबर को छठीं बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अदालत ने भी वीरभद्र को राहत देते हुए उन्हें भ्रष्टाचार और साजिश के मामले से बरी कर दिया। इस मामले की वजह से उन्हें केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ना पड़ा था।

10. नरेन्द्र मोदी: भाजपा के कद्दावर नेता नरेंद्र मोदी ने गुजरात विधानसभा चुनावों में सत्ता विरोधी लहर को पराजित कर और कांग्रेस तथा केशूभाई पटेल से मिली मामूली सी चुनौती को पार करते हुए हैट्रिक बनाई। राज्य में भाजपा को लगातार पांचवीं जीत दिलाते हुए मोदी ने अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा के अंदर प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी मजबूत की और 182 सदस्यीय विधानसभा में 115 सीटें हासिल कर पार्टी को शानदार जीत दिलाई। मोदी चौथी बार मुख्यमंत्री भी बने।

 
 
 
टिप्पणियाँ