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स्वामी विवेकानंद को थीं 31 बीमारियां
कोलकाता, एजेंसी First Published:06-01-2013 01:42:44 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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पूरी दुनिया में भारतीय आध्यात्म का झंडा बुलंद करने वाले स्वामी विवेकानंद 31 बीमारियों से पीड़ित थे और शायद यही वजह रही कि इस यशस्वी विद्वान का महज 39 साल की उम्र में देहावसान हो गया।

मशहूर बांग्ला लेखक शंकर की पुस्तक द मॉन्क एस मैन में कहा गया है कि निद्रा, यकृत और गुर्दे की बीमारियां, मलेरिया, माइग्रेन, मधुमेह और दिल की बीमारियों सहित 31 बीमारियों से स्वामी विवेकांनद को जूझना पड़ा था।

शंकर ने स्वामी विवेकानंद की बीमारियों का उल्लेख संस्कृत के एक श्लोक शरियाम ब्याधिकमंदिरम से किया है। इसका मतलब है कि शरीर बीमारियों का मंदिर होता है। इतनी बीमारियों का सामने करने वाले विवेकानंद ने शारीरिक दृढ़ता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था, गीता पढ़ने से अच्छा फुटबाल खेलना है।

विवेकानंद की एक बीमारी उनका निद्रा रोग से ग्रसित होना था। उन्होंने 29 मई, 1897 को शशि भूषण घोष के नाम लिखे पत्र में कहा था कि मैं अपनी जिंदगी में कभी भी बिस्तर पर लेटते ही नहीं सो सका।

पहले भी विवेकानंद ने नींद नहीं आने की परेशानी का उल्लेख किया था। उन्होंने न्यूयॉर्क से सारा बुल (धीरा माता) को लिखे पत्र में नींद नहीं आने के बारे में कहा था कि मेरी सेहत खराब हो चुकी है। मैं न्यूयॉर्क में आने के बाद से एक रात भी सही ढंग से नहीं सोया। मैं सोचता हूं कि समुद्र में विलीन होकर अच्छी और लंबी नींद लूं।

यह भी पता चला है कि विवेकानंद अपने पिता की तरह मधुमेह से भी पीड़ित थे और उस वक्त इस बीमारी की कारगर दवा उपलब्ध नहीं थी। शंकर लिखते हैं कि विवेकानंद ने बीमारियों से निजात पाने के लिए उपचार के कई माध्यमों का सहारा लिया। इसमें एलोपैथिक, होम्योपैथिक और आयुर्वेद की विधाएं शामिल थीं। विवेकानंद का वास्तविक नाम नरेंद्रनाथ दत्ता था।

लेखक के अनुसार, स्वामी विवेकानंद 1887 में अधिक तनाव और भोजन की कमी के कारण काफी बीमार हो गए थे। उसी दौरान वह पित्त में पथरी और दस्त के भी शिकार हो गए थे। कई बीमारियों से लड़ते हुए चार जुलाई, 1902 को विवेकानंद का 39 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की वजह तीसरी बार दिल का दौरा पड़ना था।

 

 

 
 
 
 
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