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नासा के अंतरिक्ष यान ने बुध पर खोजा बर्फीला पानी
वाशिंगटन, एजेंसी
First Published:30-11-12 02:49 PM
नासा के एक अंतरिक्ष यान ने बेहद गर्म बुध ग्रह पर स्थाई और छायादार ध्रुवीय गड्ढों में बर्फीले पानी के साथ-साथ कुछ ऐसे जमे हुए पदार्थ खोज निकाले हैं, जो वाष्पशील हैं।
नासा का एक मैसेंजर (मरकरी सरफेस, स्पेस एनवायरमेंट, जियोकैमिस्ट्री एंड रेंजिंग) नामक अंतरिक्ष यान सूर्य के सबसे निकट के ग्रह यानि बुध का अध्ययन कर रहा है। यह मार्च 2011 में वहां पहुंचा था।
नासा की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि वैज्ञानिकों ने पहली बार यह स्पष्ट रूप से देखा है कि पथ्वी समेत अन्य आंतरिक ग्रह पानी और जीवन के लिए जरूरी कुछ अन्य रसायनिक कारकों को कैसे प्राप्त करते हैं।
जॉन हॉप्किंस विश्वविद्यालय की व्यावहारिक भौतिकी प्रयोगशाला के वैज्ञानिक और मैसेंजर पर काम करने वाले डेविड लॉरेंस ने कहा, बुध के ध्रुवीय इलाकों का नया आंकड़ा उसके इन क्षेत्रों में बर्फीले पानी की उपस्थिति दर्शाता है। इसे यदि वाशिंगटन डीसी के क्षेत्रफल जितना फैला दिया जाए तो भी इस परत की मोटाई दो मील तक की होगी।
अंतरिक्ष यान के यंत्रों ने पहले बुध के उत्तरी ध्रुव पर हाइड्रोजन की अधिकता, ध्रुवीय जमावों की परावर्तकता की गणना की और फिर सतह और इसके आसपास के तापमान के विस्तृत मॉडल प्राप्त किए।
सूर्य से इसकी निकटता के चलते बुध पर बर्फ मिलना असामान्य सा लगता है। हालांकि बुध के घूर्णन अक्ष का झुकाव एक डिग्री से भी कम है। इसलिए इस ग्रह के ध्रुवों पर कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां कभी सूर्य की रोशनी नहीं पड़ती।
वैज्ञानिकों ने कई दशकों पहले सुझाया था कि बुध के ध्रुवों पर बर्फीला पानी और कुछ अन्य जमे हुए वाष्पशील पदार्थ हो सकते हैं। वर्ष 2011 में और इस वर्ष की शुरूआत में अंतरिक्षयान से ली गई तस्वीरों ने बुध के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर छायादार क्षेत्रों में चमक की पुष्टि कर दी थी।
मैसेंजर से मिले नए आकलन भी बुध के उत्तरी ध्रुव की संरचना का मुख्य घटक बर्फ होने का समर्थन करते हैं। ये गणनाएं यह भी दर्शाती हैं कि बेहद ठंडे जमाव क्षेत्रों में बर्फ बुध की सतह पर है जबकि बहुत से जमावों में यह नीचे दबी है।
जिन इलाकों में बर्फ दबी हुई है वहां की सतह पर तापमान बहुत ज्यादा है इसलिए बर्फ का स्थायी रह पाना काफी मुश्किल है। मैसेंजर के न्यूट्रान स्पेक्ट्रोमीटर ने बुध के चमकीले क्षेत्रों में हाईड्रोजन की औसत सघनता की गणना की है।
लॉरेंस ने कहा, अपने न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर की गणनाओं से हमारा आकलन है कि बर्फीला पानी उस सतह के नीचे मौजूद है, जहां हाईड्रोजन की मात्रा कम है। सतह की परत की मोटाई दस से बीस सेंटीमीटर तक है।
नासा का एक मैसेंजर (मरकरी सरफेस, स्पेस एनवायरमेंट, जियोकैमिस्ट्री एंड रेंजिंग) नामक अंतरिक्ष यान सूर्य के सबसे निकट के ग्रह यानि बुध का अध्ययन कर रहा है। यह मार्च 2011 में वहां पहुंचा था।
नासा की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि वैज्ञानिकों ने पहली बार यह स्पष्ट रूप से देखा है कि पथ्वी समेत अन्य आंतरिक ग्रह पानी और जीवन के लिए जरूरी कुछ अन्य रसायनिक कारकों को कैसे प्राप्त करते हैं।
जॉन हॉप्किंस विश्वविद्यालय की व्यावहारिक भौतिकी प्रयोगशाला के वैज्ञानिक और मैसेंजर पर काम करने वाले डेविड लॉरेंस ने कहा, बुध के ध्रुवीय इलाकों का नया आंकड़ा उसके इन क्षेत्रों में बर्फीले पानी की उपस्थिति दर्शाता है। इसे यदि वाशिंगटन डीसी के क्षेत्रफल जितना फैला दिया जाए तो भी इस परत की मोटाई दो मील तक की होगी।
अंतरिक्ष यान के यंत्रों ने पहले बुध के उत्तरी ध्रुव पर हाइड्रोजन की अधिकता, ध्रुवीय जमावों की परावर्तकता की गणना की और फिर सतह और इसके आसपास के तापमान के विस्तृत मॉडल प्राप्त किए।
सूर्य से इसकी निकटता के चलते बुध पर बर्फ मिलना असामान्य सा लगता है। हालांकि बुध के घूर्णन अक्ष का झुकाव एक डिग्री से भी कम है। इसलिए इस ग्रह के ध्रुवों पर कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां कभी सूर्य की रोशनी नहीं पड़ती।
वैज्ञानिकों ने कई दशकों पहले सुझाया था कि बुध के ध्रुवों पर बर्फीला पानी और कुछ अन्य जमे हुए वाष्पशील पदार्थ हो सकते हैं। वर्ष 2011 में और इस वर्ष की शुरूआत में अंतरिक्षयान से ली गई तस्वीरों ने बुध के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर छायादार क्षेत्रों में चमक की पुष्टि कर दी थी।
मैसेंजर से मिले नए आकलन भी बुध के उत्तरी ध्रुव की संरचना का मुख्य घटक बर्फ होने का समर्थन करते हैं। ये गणनाएं यह भी दर्शाती हैं कि बेहद ठंडे जमाव क्षेत्रों में बर्फ बुध की सतह पर है जबकि बहुत से जमावों में यह नीचे दबी है।
जिन इलाकों में बर्फ दबी हुई है वहां की सतह पर तापमान बहुत ज्यादा है इसलिए बर्फ का स्थायी रह पाना काफी मुश्किल है। मैसेंजर के न्यूट्रान स्पेक्ट्रोमीटर ने बुध के चमकीले क्षेत्रों में हाईड्रोजन की औसत सघनता की गणना की है।
लॉरेंस ने कहा, अपने न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर की गणनाओं से हमारा आकलन है कि बर्फीला पानी उस सतह के नीचे मौजूद है, जहां हाईड्रोजन की मात्रा कम है। सतह की परत की मोटाई दस से बीस सेंटीमीटर तक है।
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