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इंटरनेट ने मिलाया बिछड़े 'मनी' को परिवार से
जबलपुर, एजेंसी First Published:02-12-12 10:57 AM
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कहते हैं कि इंटरनेट वह जादुई दुनिया है, जो पल भर में ही अनजान लोगों से मिला देती है। मगर मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के एक परिवार के लिए यह बिछडे़ बेटे से मिलाने का माध्यम बन गया।

जबलपुर के कांचघर निवासी अधिवक्ता गुरुशरण सिंह बेदी के लिए सात जुलाई 2002 का दिन मुसीबत बनकर आया था, क्योंकि इसी दिन उनका आठ वर्ष का बेटा मनी लापता हो गया था। इसके बाद बेदी ने अपने बेटे को खोजने के लिए हर सम्भव कोशिश की, मगर सफलता नहीं मिली।

बेदी ने पुलिस से लेकर न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाया, मगर बात नहीं बनी। पुलिस पर दबाव बना तो उसने बेदी परिवार को एक अंजान बालक सौंपने की कोशिश की। जांच में वह बालक झारखंड का निकला।

बेदी बताते हैं कि उन्होंने शुरू से ही पुलिस द्वारा लाए गए बच्चे को अपना बेटा इसलिए नहीं स्वीकारा क्योंकि वह नागपुर के स्टेशन पर काम करता था। एक तरफ  बेदी अपने बेटे को खोज रहते थे, तो मनी अपने परिवार की तलाश में लगा था।

मनी ने एक दिन इंटरनेट के जरिए जबलपुर के पुलिस अधिकारी का फोन नम्बर हासिल कर लिया और उन तक अपनी बात पहुंचाई। मनी के संदेश के आधार पर पुलिस ने उसके परिवार का पता खोज निकाला और वह अपनों के बीच जा पहुंचा।

मनी बताता है कि उसका जबलपुर से अपहरण हो गया था और वह अपहरणकर्ताओं के चंगुल से निकलकर जम्मू एवं कश्मीर पहुंचा, जहां पुलिस ने दो दिन तक थाने में रखने के बाद अनाथालय एसओएस बालग्राम भेज दिया। वह अरसे तक इतने तनाव में रहा कि उसे कुछ भी याद नहीं रहा और वह कुछ भी समझने की स्थिति में नहीं था।

वक्त गुजरने के साथ मनी ने पढ़ाई शुरू की। काफी कोशिश करने के बाद पुरानी यादें ताजा हुईं और मनी ने जबलपुर के पुलिस अधिकारी से सम्पर्क किया और उसे अपने घर का पता मिल गया।

मनी के घर पहुंचते ही पूरा परिवार में खुशी का माहौल है। मनी की मां निर्मला कौर कहती हैं कि हमारे लिए अब तक सारे त्योहार नीरस रहते थे। मैं ईश्वर से अपने बेटे से मिलाने की प्रार्थना करती थी और भगवान ने प्रार्थना सुन ली।

एक तरफ इंटरनेट लोगों के अज्ञान को मिटाने में मदद कर रहा है तो इसी इंटरनेट ने जबलपुर में खुशियां लौटाने में मदद की है। इंटरनेट ने बेदी परिवार को 10 साल बाद बेटे के लौटने पर खुशियां मनाने का मौका दे दिया है।

 

 
 
 
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